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दतिया का दंगल: क्या कांग्रेस का 'विजयपुर मॉडल' ढहाएगा बीजेपी का किला? नरोत्तम मिश्रा पर टिकी नजरें

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने के लिए अपना 'विजयपुर माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल' लागू किया है. 40 सीनियर नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, वहीं बीजेपी ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को कमान सौंपकर संगठन के दम पर पलटवार किया है.

दतिया का दंगल: क्या कांग्रेस का 'विजयपुर मॉडल' ढहाएगा बीजेपी का किला? नरोत्तम मिश्रा पर टिकी नजरें

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. कांग्रेस ने विजयपुर उपचुनाव में जीत दिलाने वाले अपने 'माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल' को अब दतिया में भी लागू कर दिया है. इसके तहत बूथ स्तर तक जिम्मेदारियां बांटी गई हैं, जबकि बीजेपी इसे कांग्रेस की घबराहट बता रही है. सवाल यही है कि क्या कांग्रेस के लिए विजयपुर का फॉर्मूला दतिया में भी काम करेगा, या बीजेपी का मजबूत संगठन कांग्रेस की रणनीति पर भारी पड़ेगा. वैसे दिलचस्प ये है कि इस पूरे चुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ही सबसे बड़े राजनीतिक केंद्र बने हुए हैं

5 क्लस्टर और 40 दिग्गज, कांग्रेस का माइक्रो मैनेजमेंट

दतिया का चुनावी रण अब पूरी तरह सज चुका है. कांग्रेस ने चुनाव प्रचार को धार देने के लिए 'सुपर-40' टीम मैदान में उतार दी है. इसमें विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेताओं समेत 40 दिग्गजों को अलग-अलग क्लस्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हर नेता को बूथ स्तर तक पहुंचकर कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाने और चुनावी रणनीति लागू करने का जिम्मा दिया गया है.

इसके साथ ही ग्वालियर-चंबल संभाग और आसपास के जिलों के कांग्रेस जिलाध्यक्षों को भी चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है. कांग्रेस का दावा है कि इसी माइक्रो मैनेजमेंट की बदौलत विजयपुर उपचुनाव में जीत मिली थी और बुधनी में भी हार का अंतर काफी कम हुआ था, इसलिए अब इसी मॉडल के जरिए दतिया का चुनाव जीतने की रणनीति बनाई है. 

कांग्रेस के दतिया मॉडल की बड़ी बातें

पार्टी ने रणनीति के तहत दतिया को 5 क्लस्टर में बांटा है और हर क्लस्टर के लिए एक प्रभारी नियुक्त किया है. इन क्लस्टर के भीतर 7 से 8 सेक्टर बनाए गए हैं, जहां सेक्टर प्रभारियों को 3 से 7 बूथों की जिम्मेदारी दी गई है. इस तरह करीब 200 बूथों पर सीधा माइक्रो मैनेजमेंट किया जा रहा है. इस रणनीति पर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार का कहना है कि इसी जमीनी काम से पार्टी को सफलता मिलेगी. दूसरी तरफ, कांग्रेस की इस रणनीति पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है. कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि कांग्रेस को अपनी हार साफ दिखाई दे रही है, इसलिए वह घबराई हुई है. उन्होंने कहा कि बीजेपी का संगठन पहले से ही बूथ स्तर तक बेहद मजबूत है और उनके कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं.

चुनावी मुद्दों से ज्यादा नरोत्तम मिश्रा पर टिकी नजरें

दतिया उपचुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां स्थानीय मुद्दे फिलहाल पीछे छूटते नजर आ रहे हैं. पूरे चुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही सबसे बड़े राजनीतिक केंद्र बने हुए हैं. प्रचार हो, राजनीतिक बयानबाजी हो या संगठनात्मक रणनीति, हर तरफ उन्हीं की चर्चा है. बीजेपी ने उन्हें चुनाव संचालन समिति का प्रमुख बनाकर साफ संकेत दे दिया है कि इस उपचुनाव में संगठन की कमान उनके हाथ में रहेगी. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ पत्रकार सुरेश शर्मा का मानना है कि यह मुकाबला सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी के बीच नहीं, बल्कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक साख की भी बड़ी परीक्षा है.

संगठन बनाम मैनेजमेंट की जंग

दतिया के इस दंगल में जहां कांग्रेस ने विजयपुर मॉडल पर बड़ा दांव खेला है, वहीं बीजेपी अपने मजबूत संगठन और नरोत्तम मिश्रा की जगह नए चेहरे को आगे बढ़ाकर मैदान में है. इस उपचुनाव में बूथ मैनेजमेंट, जातीय समीकरण और संगठनात्मक ताकत, ये तीनों ही जीत-हार तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे. अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का यह माइक्रो मैनेजमेंट कितना रंग लाता है या फिर बीजेपी अपनी इस परंपरागत सीट को बचाने में कामयाब होती है. आखिरकार इसका अंतिम फैसला दतिया की जनता ही अपने वोटों से करेगी.
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