क्रिमिनल लॉयर से जज बनी मुस्कान की गजब सक्‍सेस स्‍टोरी, पहले 0.25 नंबर से इंटरव्यू में चूकी, फिर इस ट‍िप्‍स से लाई 41वीं रैंक

सफलता की ये कहानी (Success Story) है मध्य प्रदेश के गुना जिले की रहने वाली मुस्कान अरोरा की. वे Mp Civil Judge Exam 2022 में 41वीं रैंक लाकर सिविल जज बनी हैं. NDTV से बात करते हुए मुस्कान कहती हैं, एक दिन आपको वह सब मिलेगा जिसके आप हकदार हैं, बस तब तक सब्र और धैर्य बनाए रखें. पढ़िए, कैसे बार-बार असफल होने के बाद मुस्कान बनी जज...

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Muskan Arora Success Story: मध्य प्रदेश के गुना जिले की रहने वाली मुस्कान अरोरा बनीं जज, जानिए सफलता का मंत्र.

Muskan Arora Success Story: कोरोना काल से पहले एक 25 साल की लड़की ने जज (Judge) बनने का सपना देखा, यह सपना सिर्फ उसका नहीं था. उसके परिवार का भी था. लगन और कड़ी मेहनत के साथ उसने तैयारी की. साल 2019 में RJS EXAM (Rajasthan Judicial Services) दिया. लेकिन, लिखने की कम रफ्तार के कारण सफलता नहीं मिली. 

अगले साल 2020 में कोरोना के कारण लॉकाडउन लग गया, लेकिन सपना पूरा करने की जिद लिए ये लड़की तैयारी करती रही. अगले साल 2021 में MPCJ Exam दिया, लेकिन फिर असफलता हाथ लगी, मैन्स कटऑफ में 0.25 मार्क्स कम होने के कारण इंटरव्यू देने से रह गईं. ऐसी असफलता से हिम्मत टूटी, जी भरकर रोईं, पर हार नहीं मानी. खुद को संभाला और पूरी तरह तैयारी में झोंक दिया, संकल्प लिया कि अगली बार MPCJ Exam क्रैक करना ही है. एक साल बाद वही हुआ, जिसने पूरे परिवार के चेहरे पर 'मुस्कान' बिखेर दी. 

नमस्कार! सफलता की ये कहानी (Success Story) है मध्य प्रदेश के गुना जिले की रहने वाली मुस्कान अरोरा की. वे Mp Civil Judge Exam 2022 में 41वीं रैंक लाकर सिविल जज बनी हैं. NDTV से बात करते हुए मुस्कान कहती हैं, एक दिन आपको वह सब मिलेगा जिसके आप हकदार हैं, बस तब तक सब्र और धैर्य बनाए रखें. आइए, अब विस्तार से पढ़ते हैं उनकी सफलता की कहानी  

सबसे पहले जानिए परिवार और कॉलेज तक के सफर के बारे में 

गुना जिले की रहने वाली मुस्कान का जन्म एक शिक्षित परिवार में हुआ. उनके पिता कविंद्र पाल अरोरा प्रंसिपल रहे हैं, जबकि मां सुनीता आरोरा योग शिक्षक हैं. मुस्कान तीन बहनें और एक भाई हैं. उनकी दो बड़ी बहनें नेहा अरोरा बीओआई (Bank Of India) में जॉब करती हैं, जबकि मानवी अरोरा मैथ्स की शिक्षक हैं कोचिंग चलाती हैं. छोटा भाई शुभ आरोरा दिल्ली यूनिवर्सिटी से LLB कर रहा है. मुस्कान की स्कूलिंग गुना से ही हुई है. इसके बाद वे महाराष्ट्र चली गईं. पूने के न्यू लॉ कॉलेज (New Law College Pune - Bharati Vidyapeeth) से ग्रेजुएशन की. इसके बाद इंदौर के ओरिएंटल विश्वविद्यालय (Oriental University) से LLM (Criminal Law) की डिग्री ली. इसके बाद 2024 में उन्होंने गुना कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता वरुण सूद और अधिवक्ता दिलीप राजपूत के मार्गदर्शन में प्रैक्टिस शुरू की. इसके साथ-साथ उनहोंने अपनी तैयारी जारी रखी. 

दो बार असफलता, एक साल खराब और फिर सपना पूरा 

NDTV से बात करते हुए मुस्कान कहती हैं- सिविल जज बनना मेरा ही नहीं, मेरे परिवार का भी सपना था. इसके लिए मेहनत और लगन से तैयारी कर रही थी. लेकिन, RJS EXAM -2019 में इंटरव्यू में कुछ अंक कम होने के कारण चयन नहीं हो सका. वो इसलिए क्योंकि, लिखने की स्पीड कम होने के कारण मैन्स परीक्षा में 20 अंकों का पेपर छूट गया था. इस आत्ममंथन ने मुझे झकझोर कर रख दिया. बहुत दुख हुआ, कुछ समय बाद मैंने खुद को संभाला और फिर तैयारी में जुट गई. साल 2020 कोरोनकाल में खराब हो गया, लेकिन तैयारी जारी रही.

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Success Story: मामा-मामी, माता-पिता और भाई के साथ मुस्कान अरोरा

अगले साल 2021 में मध्यप्रदेश सिविल जज (MPCJ) की परीक्षा दी, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित इंटरव्यू कट-ऑफ से सिर्फ 0.25 अंक पीछे रहने से एक बार फिर असफल हो गई. मुस्कान कहती हैं कि इस मामूली सी पर, बड़ी असफलता ने उन्हें बड़ा झटका दिया, हिम्मत टूटी पर, उन्होंने हार नहीं मानी. खुद और अधिक मजबूत बनाकर एक बार फिर तैयारी शुरू की. एक साल बाद 2022 में फिर एग्जाम दिया. नवंबर 2025 में आए रिजल्ट में उन्होंने 41वीं रैंक हासिल की. अब एक दो महीने में वे ज्वॉइन कर सकती हैं.

शादी की बात आई तो पिता ने कहा- पहले करियर  

मुस्कान के पिता कविंद्र पाल अरोरा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे, ऐसे में उन्होंने बेटी को भरपूर सहयोग दिया. उनका मानना है कि बेटियां शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बने. जब भी शादी का सवाल उठा उन्होंने हमेशा बेटी के सपने और उसके खुद के पैरों पर खड़े होने को प्राथमिकता दी. जब-जब असफलता मिली मोटिवेट किया. वहीं योग शिक्षिका मां सुनीता ने पढ़ाई के साथ-साथ ‘हेल्थ इज वेल्थ' पर फोकस किया. बेटी को स्वास्थ्य और अध्ययन के बीच संतुलन बनाए रखना सिखाया. दो बड़ी बहनों नेहा और मानवी जो खुद सरकारी परीक्षा का अनुभव रखती हैं, ने भी मुस्कान का समय-समय पर मार्गदर्शन दिया. भाई शुभ ने तैयारी में मदद की और हमेशा यह कहकर हौसला बढ़ाया- ‘दीदी, छोड़ना मत, लगे रहना, मुझे आप पर पूरा भरोसा है. 

रिश्तेदारों और बहनों के साथ सिविल जज बनी मुस्कान.

मुस्कान की नजर में सफलता का मंत्र क्या?

वे कहती हैं, लगन और कड़ी मेहनत के साथ लगे रहें, एक दिन वह सब मिलेगा जिसके आप हकदार हैं, बस तब तक सब्र और धैर्य बनाए रखें. खुद की कमियों पर ध्यान दें, क्योंकि यह आपने बेहतर कोई नहीं जानता. अंत में मुस्कान अपनी सफलता को लेकर नानी, मामा, मामी और मौसी, दोस्तों और शिक्षकों का आभार जताती हैं, जिन्होंने इस सफर में उनका भरपूर साथ दिया.   

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