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This Article is From Feb 09, 2026

9 किमी सड़क निर्माण पर 16 करोड़ खर्च, तय मानक 7 मीटर की जगह बनाई जा रही है महज़ पौने चार मीटर

Corruption in Road Construction: भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत चैनपुर से बरेली तक लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य जारी है, जिसकी लागत करीब 15 करोड़ 16 लाख रुपये बताई जा रही है. इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और चौड़ाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.

9 किमी सड़क निर्माण पर 16 करोड़ खर्च, तय मानक 7 मीटर की जगह बनाई जा रही है महज़ पौने चार मीटर

मध्य प्रदेश में विकास कार्यों को पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की बात अक्सर सरकारी स्तर पर कही जाती है, लेकिन रायसेन जिले से सामने आया एक मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है. दरअसल, भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत चैनपुर से बरेली तक लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य जारी है, जिसकी लागत करीब 15 करोड़ 16 लाख रुपये बताई जा रही है. इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और चौड़ाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क की चौड़ाई निर्माण मानकों के अनुसार लगभग 7 मीटर होनी चाहिए, वह वास्तविकता में करीब 12 फीट (लगभग 3.75 मीटर) ही बनाई जा रही है. यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो लागत और निर्माण के बीच भारी अंतर सामने आ सकता है. ग्रामीणों का मानना है कि इतनी कम चौड़ाई वाली सड़क पर 15 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होना संदेह पैदा करता है.

पांच पंचायतों के ग्रामीणों ने उठाई आवाज

गनवाडा, चैनपुर, करमबाड़ा, रतनपुर, रिमसिली और खपड़िया सहित कई गांवों के लोगों ने इस मुद्दे पर सामूहिक आपत्ति जताई है. ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित कर एसडीएम संतोष मुदगल को ज्ञापन सौंपा और निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग की. उनका कहना है कि सड़क की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं दिख रही, जिससे भविष्य में सड़क के जल्दी खराब होने की आशंका है.

प्रशासन ने दिया जांच का भरोसा

एसडीएम संतोष मुदगल ने ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के इंजीनियरों से चर्चा करने और मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है. प्रशासनिक स्तर पर जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि निर्माण में वास्तव में अनियमितता हुई है या नहीं.

सवालों के घेरे में निर्माण एजेंसी और निगरानी व्यवस्था

इतनी बड़ी परियोजना में यदि मानकों से समझौता हुआ है, तो यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि वित्तीय अनियमितता का मामला भी बन सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह सड़क भी अन्य अधूरे और कमजोर निर्माण कार्यों की तरह जल्द ही खराब हो सकती है.

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अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं. क्या यह सड़क डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के अनुसार दोबारा जांची जाएगी? क्या गुणवत्ता परीक्षण होगा? और यदि गड़बड़ी साबित हुई, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या नहीं? ये सवाल फिलहाल इलाके में चर्चा का विषय बने हुए हैं. ऐसे में ग्रामीणों की मांग साफ है कि जनता के पैसे से बन रही सड़क पूरी गुणवत्ता और तय मानकों के अनुसार बने, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके.

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