मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार यानी आज इंदौर में मध्य प्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 से वित्त पोषित प्रदेश की पहली अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा का शुभारंभ करेंगे. शहर से पहली फ्लाइट आबू धाबी के लिए उड़ान भरेगी. यह उड़ान प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी आबू धाबी से सीधे जोड़ेगी. टाटा समूह की विमानन इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित यह सेवा सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, शुक्रवार एवं रविवार) को उपलब्ध रहेगी.
इंदौर से आबू धाबी हवाई सेवा प्रारंभ होने से मालवा-निमाड़ क्षेत्र की बड़ी आबादी को लाभ मिलेगा. वर्तमान में इस मार्ग पर यात्रियों को दिल्ली अथवा मुंबई के माध्यम से यात्रा करनी पड़ती है, जिससे लगभग 7 से 8 घंटे का समय लगता है. नई उड़ान शुरू होने से यह यात्रा लगभग 3 घंटे 15 मिनट में पूरी हो सकेगी. इससे व्यापार, निवेश, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
राज्य सरकार नागरिक विमानन नीति-2025 के माध्यम से प्रदेश में हवाई संपर्क का निरंतर विस्तार कर रही है. नीति के अंतर्गत अब तक 8 नए हवाई मार्ग स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 4 पर सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं और शेष मार्गों पर भी शीघ्र सेवाएं शुरू की जाएंगी. इंदौर-आबू धाबी हवाई सेवा का शुभारंभ प्रदेश की विमानन नीति की प्रभावशीलता एवं एयरलाइंस के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है. इससे भविष्य में नए अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू हवाई मार्गों के विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त होगा.
नागरिक विमानन नीति से सुदृढ़ हो रहा है प्रदेश का विमानन इकोसिस्टम
प्रदेश के विमानन इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से लागू मध्य प्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 में नवीन घरेलू हवाई मार्गों के विकास के लिए 10 लाख रुपये तक और अंतर्राष्ट्रीय मार्गों के लिए 15 लाख रुपये तक वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) सहायता का प्रावधान किया गया है. राज्य के हवाई अड्डों पर रात्रि पार्किंग करने वाले विमानों के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर वैट की प्रभावी दर 1 प्रतिशत निर्धारित की गई है.
नीति के अंतर्गत मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) परियोजनाओं के लिए 40 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी तथा एयर कार्गो परियोजनाओं के लिए पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है. साथ ही, कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए सिमुलेटर स्थापित करने वाले उड़ान प्रशिक्षण संगठनों (एफटीओ) को 40 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी तथा गैर-सिम्युलेटर प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए फीस का 60 प्रतिशत, अधिकतम एक लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है.
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