Chain Snatching in Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में AIIMS की एक महिला कर्मचारी के साथ लिफ्ट के अंदर चेन स्नैचिंग की वारदात सामने आई है. इस घटना ने देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले चिकित्सा संस्थानों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. CCTV फुटेज सामने आने के बाद इस घटना से पूरे भोपाल में हड़कंप मच गया.
स्त्री रोग विभाग में अटेंडेंट पीड़िता वर्षा सोनी ने बताया कि सोमवार शाम को ड्यूटी के दौरान ब्लड बैंक के पीछे स्थित एक लिफ्ट में अकेली थीं. इसी दौरान मास्क पहने एक युवक लिफ्ट में घुसा और बातचीत के बहाने नेत्र रोग विभाग की मंजिल पूछने लगा.
मंगलसूत्र लेकर फरार
जैसे ही लिफ्ट तीसरी मंजिल पर पहुंची, युवक बाहर निकलकर अचानक पलटा और महिला पर झपट पड़ा. उसने वर्षा की सोने की मोतियों वाली चेन और मंगलसूत्र छीनने की कोशिश की. वर्षा ने विरोध किया, लेकिन आरोपी धक्का देकर सीढ़ियों की ओर भाग गया. युवक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गया, जबकि मोतियों की चेन टूटकर वहीं गिर गई.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के वक्त लिफ्ट क्षेत्र में एक भी सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था. पीड़िता ने बागसेवनिया थाने में लिखित शिकायत दी है.
गणतंत्र दिवस के मौके का उठाया फायदा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी IPD गेट से फरार हुआ है. रविवार और 26 जनवरी की छुट्टी के चलते सुरक्षा व्यवस्था ढीली थी, जिसका उसने फायदा उठाया. सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने चेहरा ढक रखा था, जिससे पहचान में मुश्किल आ रही है.
कानूनी बदलाव का असर!
भोपाल की सड़कों के बाद अब अस्पताल भी उस कानूनी बदलाव का असर झेल रहे हैं, जिसने अपराध की प्रकृति ही बदल दी है. नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत चेन, पर्स और मोबाइल छीनने जैसे अपराधों को फिर से वर्गीकृत किया गया है. पहले ऐसे मामलों को डकैती/लूट की श्रेणी में दर्ज किया जाता था, जिसमें 10 से 14 साल तक की सजा का प्रावधान था. अब इन्हें “स्नैचिंग या झपटमारी” माना जाता है, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा है गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं रही, जमानत आसानी से मिल जाती है और कई मामलों में आरोपी केवल नोटिस पर छूट जाता है.
आंकड़ों में फर्क दिखा
इस बदलाव का असर आंकड़ों में साफ दिखता है. 2024 में झपटमारी के 39 मामले दर्ज हुए, जबकि 2025 में 165 से अधिक स्नैचिंग केस सामने आ चुके हैं, यानी एक साल से भी कम समय में मामले चार गुना बढ़ गए. पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में हर दूसरा स्ट्रीट क्राइम अब स्नैचिंग है.
जहां पहले लूट के मामलों में गिरफ्तारी, कड़ी पूछताछ और अदालत की सख्त निगरानी होती थी, वहीं अब “गैर-गंभीर अपराध” मानी जाने वाली स्नैचिंग ने अपराधियों के पक्ष में पूरा संतुलन झुका दिया है. जेल का डर खत्म हो चुका है. पकड़े जाने का डर भी कम होता जा रहा है. कुछ दिनों पहले तो नीमच के पूर्व विधायक के बेटे ने कथित तौर पर प्रेमिका के महंगे शौक पूरे करने के लिए चेन स्नैचिंग का सहारा लिया था और अहमदाबाद में गिरफ्तार हुआ.
ये भी पढ़ें- गणतंत्र दिवस पर 9 कैदी तो रीवा जेल से आए बाहर, 10वां नहीं हुआ रिहा; इस वजह से और काटेगा 2 साल की सजा