बड़ा डेंजरस निकला कैल्शियम कार्बाइड गन, राजधानी भोपाल में चोटिल हुए पांच दर्जन लोग, अस्पताल में चल रहा इलाज

Dangerous Diwali: दिवाली में पटाखे चलाने से चोटिल होने की खबरें आम है, लेकिन इस दिवाली कैल्शियम कार्बाइड गन ने लोगों की दिवाली खराब कर दी है. कैल्शियम कार्बाइड गन का इस्तेमाल बहुत खतरनाक रहा. इससे कई लोगों की आंखों की रोशनी तक छिनने की नौबत आ गई है.

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CALCIUM CARBIDE GUN OF DIWALI BACKFIRES, FIVE DOZEN INJURED IN CAPITAL BHOPAL, MP
भोपाल:

Dangerous Gan: दीपावली के मौके पर भोपाल में 'खतरनाक' कैल्शियम कार्बाइड गन के इस्तेमाल से चोटिल हुए 60 से अधिक लोग राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए हैं. घायलों में अधिकांश 8 से 14 साल के मासूम बच्चे हैं. कैल्शियम कार्बाइड गन के इस्तेमाल से किसी का चेहरा झुलस गया, तो किसी की आंखों की रोशन खोने की नौबत आ गई है. 

दिवाली में पटाखे चलाने से चोटिल होने की खबरें आम है, लेकिन इस दिवाली कैल्शियम कार्बाइड गन ने लोगों की दिवाली खराब कर दी है. कैल्शियम कार्बाइड गन का इस्तेमाल बहुत खतरनाक रहा. इससे कई लोगों की आंखों की रोशनी तक छिनने की नौबत आ गई है.

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सीएमएचओ ने 'कार्बाइड पाइप गन' काफी खतरनाक बताया

राजधानी भोपाल की विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 8 से 14 वर्षीय बच्चों के पुरसाहाल पर प्रतक्रिया देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुछ लोगों के चेहरे झुलस गए हैं तो कुछ के आंखों की रोशनी भी खतरे में पड़ गई है. भोपाल के सीएमएचओ ने 'कार्बाइड पाइप गन काफी खतरनाक बताया है.

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गन के इस्तेमाल से राजधानी में 60 से अधिक लोग घायल हुए

 भोपाल के सीएमएचओ के मुताबिक खतरनाक कैल्शियम कार्बाइड गन के इस्तेमाल से राजधानी में 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें राजधानी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका अभी भी इलाज जारी है. हालांकि सीएमएचओ ने आश्वस्त किया है कि सभी लोग सुरक्षित हैं.

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कार्बाइड गन के इस्तेमाल से चोटिल  पांच लोग राजधानी भोपाल के सेवा सदन अस्पताल में इलाज हो रहा है जबकि अन्य लोग हमीदिया अस्पताल, जेपी अस्पताल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती किए गए हैं. एम्स में भर्ती एक मरीज की आंखों की रोशनी का इलाज चल रहा है. 

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पूरे भोपाल शहर में ऐसे 150 से अधिक मामले सामने आए

एक अधिकारी ने बताया कि दीपावली के अगले दिन पूरे भोपाल शहर में ऐसे 150 से अधिक मामले सामने आए थे, जिनमें से कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि एम्स में भर्ती 12 वर्षीय बच्चे की आंखों की रौशनी लौटाने के लिए चिकित्सकों की टीम प्रयासरत है.

परिजनों ने गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की मांग की है

रिपोर्ट के मुताबिक हमीदिया में भर्ती खतरनाक गन के इस्तेमाल से चोटिल दो बच्चों की आंखों की रौशनी लौटाने के लिए उपचार जारी है. हमीदिया अस्पताल में अभी करीब 10 बच्चे भर्ती हैं. हमीदिया अस्पताल में भर्ती 14 साल के हेमंत पंथी और 15 साल के आरिस के परिजनों ने ‘गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की मांग की है.

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गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल से बनाया गया देसी गन इस दीपावली प्रचलन में खूब रहा. गन में भरा कैल्शियम कार्बाइड जैसे ही पानी से मिलता है तो एसिटिलीन गैस बनाता है और चिंगारी मिलते ही विस्फोट होता है, जिसने खूब चर्चा बंटोरी थी.

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आंखों, चेहरे और त्वचा के लिए ज्यादा खतरनाक है गन

जानकारों ने बताया कि विस्फोट से पाइप के टूटने पर निकलने वाले छोटे-छोटे प्लास्टिक के टुकड़े छरों की तरह शरीर में घुसकर गंभीर चोटें करते हैं और शरीर के विभिन्न हिस्सों को नुक़सान पहुंचाते हैं, विशेषकर आंखों, चेहरे और त्वचा के लिए ज्यादा खतरनाक बन जाता है. 

मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद बाजार में धड़ल्ले से बिका

सीएमएचओ शर्मा ने बताया कि प्रशासन लगातार कार्बाइड गन बेचने और बनाने वालों पर कार्रवाई कर रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 18 अक्टूबर को अधिकारियों के साथ एक बैठक में प्रदेश के जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि कार्बाइड पाइप गन की बिक्री ना हो, लेकिन बाजारों में धड़ल्ले से बिका।

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