भोपाल चिनार ड्रीम सिटी में फिर लिफ्ट हादसा, 10 दिन तक शव पर चलती रही लिफ्ट, अब छठी मंजिल से गिरी; दो घायल

चिनार ड्रीम सिटी के फ्लैट नंबर 605 में रहने वाले अनुज पाठोल सुबह करीब 9.40 बजे अपने सहकर्मी प्रदीप के साथ ऑफिस के लिए निकल रहे थे. जैसे ही अनुज ने शटर खोला और अंदर कदम रखा, उन्हें बटन दबाने का मौका भी नहीं मिला. लिफ्ट अचानक नीचे चली गई. इससे दोनों घायल हो गए.

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Bhopal Lift Accident: चिनार ड्रीम सिटी में फिर लिफ्ट हादसा.

राजधानी भोपाल के चिनार ड्रीम सिटी में 77 वर्षीय बुजुर्ग का सड़ा-गला शव 10 दिनों तक लिफ्ट शाफ्ट में फंसा रहा और लिफ्ट उसके ऊपर चलती रही. इस भयावह खुलासे के कुछ ही दिनों बाद उसी रिहायशी परिसर में एक और हादसा हो गया. शनिवार 28 फरवरी की सुबह छठी मंजिल से लिफ्ट अचानक सीधे नीचे आ गिरी, जिसमें दो लोग घायल हो गए. घटना के बाद लोगों में गुस्सा फूट पड़ा है. इस हादसे को आपराधिक लापरवाही बताया जा रहा है.

जानकारी के अनुसार, फ्लैट नंबर 605 में रहने वाले अनुज पाठोल सुबह करीब 9.40 बजे अपने सहकर्मी प्रदीप के साथ ऑफिस के लिए निकल रहे थे. लिफ्ट पहले से ही छठी मंजिल पर खड़ी थी. जैसे ही अनुज ने शटर खोला और अंदर कदम रखा, उन्हें बटन दबाने का मौका भी नहीं मिला. अस्पताल में भर्ती अनुज ने बताया कि “कुछ ही सेकंड में लिफ्ट तेज रफ्तार से नीचे जाने लगी. शटर आधा खुला हुआ था. मैंने इमरजेंसी बटन दबाने की कोशिश की, लेकिन कुछ काम नहीं किया.” तेज धमाके के साथ लिफ्ट नीचे आ गिरी और ग्राउंड फ्लोर से लगभग एक फीट नीचे बने सीमेंट बेस में धंस गई. सदमे की हालत में दोनों ने आधा जाम हुए शटर को धक्का देकर बाहर निकलने की कोशिश की और किसी तरह बाहर आए. अनुज की टांग में फ्रैक्चर हो गया, जबकि प्रदीप को मामूली चोटें आईं.

“यूज़ एट योर ओन रिस्क” का नोटिस लगाया 

चिनार ड्रीम सिटी में रहने वाले लोगों का आरोप है कि लिफ्ट की नियमित और प्रमाणित सर्विसिंग के बजाय अस्थायी और लोकल मरम्मत कर काम चलाया जा रहा था. देवेश, जो यहां रहते हैं, बताते हैं, “लोकल रिपेयर करके लिफ्ट चला रहे हैं. हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ. बस लिफ्ट पर एक नोटिस चिपका दिया गया- “यूज़ एट योर ओन रिस्क” यानी लिफ्ट का प्रयोग अपने जोखिम पर करें.” उन्होंने बताया कि लिफ्ट हाल ही में बंद भी थी. “27 फरवरी को ही मैकेनिक को बुलाकर लिफ्ट ठीक करवाई और अगले दिन हादसा हो गया. उन्होंने कहा कि हम हर महीने 1500 रुपये मेंटेनेंस देते हैं. फिर लोकल वेंडर से लिफ्ट क्यों ठीक करवाया गया.  

10 दिन तक शाफ्ट में पड़ा रहा शव

इसी सोसायटी में इससे पहले भी एक दिल दहला देने वाली घटना हो चुकी है. 6 जनवरी को 77 वर्षीय प्रीतम गिरी लापता हो गए थे. परिवार ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई. इसी बीच एक लिफ्ट से कई दिनों से बदबू आने की शिकायतें मिल रही थीं. जब मेंटेनेंस टीम ने लिफ्ट केबिन को ऊपर उठाकर जांच की, तो शाफ्ट के नीचे सड़ा-गला शव मिला. कपड़ों और चप्पलों से परिजनों ने उसकी पहचान प्रीतम गिरी के रूप में की.

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आरोप है कि 10 दिनों तक लिफ्ट उनके शव के ऊपर चलती रही

पुत्र मनोज गोस्वामी ने पीड़ा जताते हुए कहा, “हमने 10 दिन तक अपने पिता को खोजा. हम हर महीने मेंटेनेंस देते हैं, लेकिन वे लिफ्ट के अंदर दबे रहे. अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई. किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया. मैं चाहता हूं इसमें नामजद एफआईआर हो.”

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450 परिवारों में डर और गुस्सा

कॉम्प्लेक्स में करीब 450 परिवार रहते हैं. लगातार हादसों ने सभी को दहशत में डाल दिया है. वहां रहने वाली ज्योति खरे ने कहा, “हम लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं. लिफ्ट खराब हो रही है. हमने कहा था इसे बंद कर दो, जान ज्यादा कीमती है. एक व्यक्ति 10 दिन तक पड़ा रहा, आज दो लोग घायल हो गए. अब हर कोई लिफ्ट में बैठने से डर रहा है.”

  • एल-105 में रहने वाली शशि ने बताया कि उनकी मां तीसरी मंजिल तक भी लिफ्ट इस्तेमाल करने से मना करती हैं. 
  • आर.पी. पांडे ने कहा, “यहां कई बुजुर्ग और बीमार लोग रहते हैं. लिफ्ट का रखरखाव नहीं हो रहा. पूरा सिस्टम ढह रहा है. सख्त फैसला तुरंत लिया जाना चाहिए.”
  • पूर्व समिति सदस्य एस.एल. महोदय का दावा है कि लिफ्ट शुरू से ही समस्या ग्रस्त थी. “हमने बार-बार तकनीशियन को बताया. कहा गया कि मरम्मत महंगी है. सहकारी विभाग ने प्रशासक नियुक्त किया है, फिर भी लिफ्ट ठीक नहीं हुई. या तो इसे बंद करो या सही तरीके से मरम्मत कर NOC लो.”
  • प्रमोद बाजपेयी ने तत्काल कार्रवाई की मांग की. “या तो लिफ्ट ठीक करो या स्थायी रूप से बंद करो. पिछली घटना से सबक नहीं लिया गया. सरकार और प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए.”

सोसायटी शासन-प्रशासन की देखरेख में  

लगातार शिकायतों के बावजूद लिफ्ट बिना समुचित सुरक्षा जांच के चलती रही, ऐसा आरोप निवासियों का है. जांच “जारी” है, लेकिन चिनार ड्रीम सिटी की हर मंजिल पर डर उतर चुका है. अब वहां लिफ्ट में कदम रखना सुविधा नहीं, बल्कि जिंदगी के साथ एक जोखिम भरा दांव बन गया है. ये हाल तब हैं जब रजिस्ट्रार सोसायटी के जरिये वहां प्रशासक काम कर रहे हैं, यानी सोसायटी परोक्ष रूप से शासन-प्रशासन की देखरेख में है.

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