Basant Panchami 2026 Saraswati Puja: बसंत पंचमी (Basant Panchami) पर माता सरस्वती की उपासना (Saraswati Puja) का विशेष विधान होता है. बसंत पंचमी हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन ज्ञान, संगीत, कला और विद्या की देवी माता सरस्वती को समर्पित है. बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होने के साथ ही यह श्री पंचमी या सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन श्रद्धालु अज्ञानता, आलस्य और सुस्ती से मुक्ति पाने के लिए मां सरस्वती की उपासना करते हैं. कई जगह छोटे बच्चों का बसंत पंचमी के दिन ही पहला अक्षर लिखवाने या विद्या आरंभ की परंपरा है. वहीं, स्कूलों में सुबह सरस्वती पूजा का आयोजन होता है.
Basant Panchami 2026: सरस्वती माता की पूजा का महत्व
इस साल कब से कब तक है पंचमी तिथि? Basant Panchami 2026 Date
दृक पंचांग के अनुसार, 22 जनवरी की देर रात 1 बजकर 46 मिनट पर पंचमी तिथि शुरू होगी और अगले दिन तक रहेगी. नक्षत्र पूर्व भाद्रपद दोपहर 2 बजकर 33 बजे तक है, उसके बाद उत्तर भाद्रपद शुरू होगा. चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे. सूर्योदय 7 बजकर 13 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर मिनट पर होगा. पूरे दिन पंचक रहेगा.
शुभ मुहूर्त Saraswati Puja Shubh Muhurat
राहुकाल सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक है. इस दौरान कोई भी शुभ या नया कार्य न करें. अन्य अशुभ समय में यमगंड 3 बजकर 13 मिनट से 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक और विजय मुहूर्त 2 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 2 मिनट तक है.
Basant Panchami 2026: सरस्वती माता की पूजा विधि
बसंत पंचमी पर सरस्वती माता की पूजा विधि
बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की उपासना का विशेष विधान है. सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले रंग के) पहनें. पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती का ध्यान करें. सबसे पहले गणपति की पूजा पहले करें. मां को गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत और सिंदूर का तिलक लगाएं. पीले फूलों की माला, आम के पत्ते और शृंगार सामग्री अर्पित करें. पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र उनके समक्ष रखें. पूजन के बाद ओम ऐं सरस्वत्यै नमः का कम से कम 108 बार जप करें. माता की आरती उतारें और भोग लगाएं.
सरस्वती माता का भोग
मां सरस्वती को पीले रंग की चीजें प्रिय हैं. भोग में केसर युक्त हलवा, मालपुआ, बूंदी के लड्डू, केसरिया चावल, दूध से बनी मिठाई, तिल के लड्डू, पके केले, नारियल और पीली मिठाई, मालपुआ चढ़ाएं. फल, पीले फूल और गुलाल उनके चरणों में जरूर लगाएं.
विद्यारंभ का महत्व, ये स्थान हैं खास
देशभर में ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित दिन बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा. इस दिन विद्यालयों से लेकर मंदिरों तक में विशेष पूजा-पाठ और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं. दक्षिण भारत में मां सरस्वती को समर्पित कई ऐसे मंदिर हैं, जहां ज्ञान की देवी मां सरस्वती का पूजन बड़े पैमाने पर किया जाता है. उन्हीं मंदिरों में से एक है शृंगेरी शारदा पीठम, जहां महर्षियों ने तपस्या की है और इसी वजह से आज भी इस मंदिर में वेदों को जानने और समझने वाले लोग शिक्षा लेने के लिए पहुंचते हैं.
- राजस्थान के बसंतगढ़ में मां सरस्वती को समर्पित विशेष मंदिर सरस्वती उद्गम मंदिर स्थित है, जहां बसंत पंचमी के दिन मंदिर में लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की विशेषता मां को लगने वाला भोग भी है. मंदिर में मां को भोग स्वरूप मिष्ठान के अलावा, कॉपी और पैन भी चढ़ाते हैं. भक्त विशेष रूप से मां को कॉपी और पैन भेंट करते हैं.
- आंध्र प्रदेश के वारंगल सरस्वती मंदिर में बसंत पंचमी के दिन बच्चों और विद्यार्थियों के लिए विशेष अक्षराभ्यास का आयोजन किया जाता है और मां को केसरिया मीठे चावल, मीठे पूए और पीले मिष्ठान का भोग लगता है. बच्चे और विद्यार्थी दोनों ही बसंत पंचमी के दिन मां का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं.
- ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर में बसंत पंचमी का त्योहार अनोखे तरीके से मनाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन मंदिर में मां सरस्वती और प्रभु जगन्नाथ को 'बसंत काकेरा' का भोग लगता है. प्रसाद को प्रभु जगन्नाथ के अलावा, 'दक्षिण घर' में चढ़ाया जाता है, जहां मां लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं. बसंत काकेरा गेहूं और चावल के आटे से बना मीठा भोग होता है.
- तेलंगाना के बसरा में स्थित ज्ञान सरस्वती मंदिर में भी बसंत पंचमी के दिन मंदिर में अनुष्ठान और 'अक्षराभ्यासम' का आयोजन होता है और भोग के रूप में पीले मीठे चावल और पीली बुंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं.
मैहर की माता शारदा
मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित 51 शक्तिपीठों में से शारदा देवी मंदिर में बसंत पंचमी की रौनक अलग ही देखने को मिलती है. बसंत पंचमी के दिन मंदिर में मां शारदा को हलवा-पूरी और केसरिया खीर का भोग लगाया जाता है और मां को पीले वस्त्र भी पहनाए जाते हैं. भक्त भी बड़ी संख्या में पीले फूल और पीले मिष्ठान लेकर मंदिर पहुंचते हैं.
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