MP Board Exam: लड़की बनकर बोर्ड एग्जाम में पहुंचा लड़का, जवाब सुन स्टाफ रह गया हक्का-बक्का

MP Board Exam: पीली शर्ट, लंबे बाल और गोल टोपी लगाकर परीक्षा केंद्र पहुंचा परीक्षार्थी अपनी वेशभूषा से पूरी तरह से लड़की नजर आ रहा था. परीक्षार्थी के हुलिए से सेंटर पर तैनात स्टाफ को आशंका हुई तो उसकी पहचान के लिए दस्तावेजों की जांच की गई. दस्तावेज की जांच परीक्षार्थी की पहचान सटीक निकली, तो परीक्षा केंद्र में तैनात स्टाफ दंग रह गया.

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BOY DISGUISED AS A GIRL AND WENT TO APPEAR IN BOARD EXAM

Boy Disguised As A Girl: मध्य प्रदेश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही है. शुक्रवार को बड़वानी जिले में एक परीक्षा सेंटर में तब अफरातफरी मच गई जब एक परीक्षार्थी लड़की के वेश में परीक्षा देने पहुंच गया. लड़की की भेष में पहुंचे परीक्षार्थी को देखकर पूरा स्टाफ हक्का-बक्का रह गया. परीक्षार्थी की तलाशी की गई और बोर्ड परीक्षा के लिए जारी प्रवेश पत्र में लड़के की पहचान की गई, तो बहुरुपिया परीक्षार्थी निकला.

पीली शर्ट, लंबे बाल और गोल टोपी लगाकर परीक्षा केंद्र पहुंचा परीक्षार्थी अपनी वेशभूषा से पूरी तरह से लड़की नजर आ रहा था. परीक्षार्थी के हुलिए से सेंटर पर तैनात स्टाफ को आशंका हुई तो उसकी पहचान के लिए दस्तावेजों की जांच की गई. दस्तावेज की जांच परीक्षार्थी की पहचान सटीक निकली, तो परीक्षा केंद्र में तैनात स्टाफ दंग रह गया.

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लड़की के वेश में पहुंचे परीक्षार्थी को तैनात स्टाफ पहचान न सका

रिपोर्ट के मुताबिक जिले के पानसेमल में एक शासकीय कन्या विद्यालय परीक्षा केंद्र पर लड़की के वेशभूषा में बहुरुपिया परीक्षार्थी बोर्ड परीक्षा का अंतिम पेपर देने पहुंचा था. एक आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाला परीक्षार्थी होली और रंग पंचमी के मौके अलग-अलग रूप धर कर फाग मांगते हैं. शुक्रवार को जब लड़की के वेश में परीक्षा देने पहुंचा तो परीक्षा केंद्र में तैनात स्टाफ चौंक गया. 

पूरे 5 दिनों तक आदिवासी समुदाय के लोग घर-घर फाग मांगते हैं

गौरतलब है गैर आदिवासी समुदाय के लोग होली से लेकर रंग पंचमी तक बहुरुपिया बनकर घर-घर फाग मांगते हैं. ऐसी मान्यता है कि आदिवासी समुदाय के लोग पूरे 5 दिनों इसी हालत में रहते हैं. समुदाय का कोई भी सदस्य पांच दिनों तक ने घर नहीं जाता है और न ही वेशभूषा ही बदल सकता है. चूंकि रंग पंचमी से पहले परीक्षार्थी को एग्जाम देने पहुंचने था तो वो लड़की के रूप में वह बोर्ड परीक्षा देने पहुंच गया. 

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आदिवासी समाज का सबसे बड़ा त्यौहार भगोरिया और होली माना जाता है. होली के दरमियान समुदाय के लोग 5 दिनों तक गांव-गांव जाकर फाग मांगते हैं. इस दौरान समुदाय के लोग पूरे पांच दिनों तक घरों से बाहर रहते हैं और अलग-अलग रूप धारण कर लोगों का मनोरंजन भी करते हैं. इसी परंपरा को निभाते हुए परीक्षार्थी बोर्ड एग्जाम देने पहुंच गया था.

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लड़की के वेश में परीक्षार्थी को देख स्टाफ का दिमाग चकरा गया

दरअसल, लड़की के भेष में बोर्ड परीक्षा देने पहुंचे परीक्षार्थी को देख पूरा स्टाफ आशंकित हो गया और परीक्षार्थी को नकल गिरोह का सदस्य समझ लिया. तसल्ली के लिए जब स्टाफ ने बहुरुपिए परक्षार्थी का प्रवेश पत्र देखा और प्रवेश पत्र में उसके चेहरे की मिलान की, तो मुस्कुराए बिना रह सके. जब लड़के ने स्टाफ को आदिवासी संस्कृति के बारे में बताया, तब जाकर परीक्षा हाल में बैठाया गया.

ओसवाड़ा निवासी सुनताम भंडारे के रूप में हुई परीक्षार्थी की पहचान 

उल्लेखनीय है होली उत्सव के दौरान गैर आदिवासी समुदाय के लोग रंग पंचमी तक लड़की की वेशभूषा में घर-घर जाकर फाग मांगते हे और फाग से एकत्रित राशि से रंगपंचमी का त्योहार मनाते हैं. ओसवाड़ा निवासी परीक्षार्थी की पहचान सुनताम भंडारे के रूप में हुई है, जो गांव के अन्य युवाओं के साथ फाग टोली में शामिल हुआ था और परंपरा निभाते हुए लड़की के भेष में परीक्षा देने के लिए पहुंचा था.

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