
Karma Puja 2025 Kab Hai, Puja Vidhi Importance: करमा पूजा (Karam Festival) का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति पूजन का प्रतीक है. यह त्योहार मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और ओडिशा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं और करम देवता की पूजा करती हैं. आदिवासी परंपरा अनुसार, इस खास मौके पर करमा धरमा कथा का खास महत्व होता है. इस दिन प्रकृति और पेड़ों की भी पूजा की जाती है और भूमि की समृद्धि के लिए कामना की जाती है.
ऐसे में आज यहां जानते हैं कब है करमा पूजा, क्यों करम डाल की होती है पूजा और इसका महत्व भी...
कब मनाया जाता है करमा पर्व? (Karma Puja 2025 Kab)
हिंदू पंचांग के अनुसार, करमा पर्व हर साल भादो माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि बुधवार, 3 सितंबर को सुबह 4:53 बजे प्रारंभ होगी, जो अगले दिन गुरुवार, 4 सितंबर 2025 को सुबह 4:21 बजे समाप्त होगी.
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है करमा पर्व
करम भाई-बहन के प्यार को दर्शाता है. खासकर महिलाएं अपने भाइयों की लंबी उम्र और अच्छे भविष्य के लिए व्रत रखती हैं.
कब है करमा पूजा? (Karma Puja 2025 Date)
इस साल करमा पूजा का त्योहार बुधवार, 3 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी. यह पर्व विशेष रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा में मनाया जाता है.

Photo Credit: Facebook|Nayan Shaurya
क्यों की जाती करम डाल की पूजा?
करमा पूजा के दिन करम डाली की पूजा की जाती है. इस खास मौके पर घर और आंगन को सजाया जाता है. आदिवासी परंपरा के अनुसार, करम की डाली को पूरे रीति-रिवाज के साथ धार्मिक स्थल अखरा में लगाया जाता है. वहीं इसकी पूजा रात में की जाती है. कहा जाता है करम आदिवासी समुदाय के लिए आराध्य वृक्ष (Tribal community sacred tree) हैं. इसलिए करम के अवसर पर करम डाल की पूजा की जाती है. इसके अलावा करम पर्व में जावा का भी काफी महत्व होता है.

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दरअसल, आदिवासी समुदाय अपने आराध्यों को प्रकृति में ही देखता है और मूलत प्रकृति पूजक है. उसके देवी-देवता प्रकृति में ही निहित हैं. करम डाल की पूजा भी इसलिए की जाती है कि करम डाल ईश्वर (प्रकृति) का प्रतीक रूप है. पूजा के दौरान करम वृक्ष का आह्वान किया जाता है.
करमा पूजा का महत्व और कथा (Karma Puja 2025 Importance Katha)
करम पूजा के अवसर पर करमा और धरमा नाम के दो भाइयों की कहानी भी सुनाई जाती है. इस कहानी को सुने बिना करम पूजा अधूरी मानी जाती है. ऐसा कहा जाता है कि इस पर्व को मनाने से गांव में खुशहाली आती है. करम के दिन घर-घर में तरह-तरह के पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं.
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