छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में धर्मांतरण को लेकर तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है. आमाबेड़ा की घटना के बाद अब ओरछा ब्लॉक के अंदरूनी क्षेत्र अबूझमाड़ स्थित ईकनार गांव में वैसी ही एक और घटना सामने आने का दावा किया जा रहा है. वायरल वीडियो और स्थानीय सूत्रों के अनुसार बुधवार (21 जनवरी 2026) की सुबह गांव के ही दो परिवारों के साथ मारपीट कर उन्हें गांव से बाहर निकाल दिया गया और उनकी गृहस्थी को नुकसान पहुंचाया गया.
बताया ये भी जा रहा है कि इन लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड और जमीन के कागजात भी जला दिए गए हैं. इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बताया जा रहा है. पूरे मामले ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जंगलों के बीच बसे गांव में हुई घटना
जानकारी के अनुसार घटना सुबह करीब 8 बजे की बताई जा रही है. ओरछा तहसील मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसे ग्राम ईकनार में अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई. सूत्रों के मुताबिक बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और कथित रूप से दो परिवारों को निशाना बनाया गया.
16 सदस्यों को गांव से निकाले जाने का दावा
वायरल वीडियो और सूत्रों के अनुसार इन दो परिवारों में कुल 16 सदस्य हैं, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल बताए जा रहे हैं. आरोप है कि इन लोगों के साथ मारपीट की गई और भय के माहौल में उन्हें गांव छोड़ने का आदेश देकर बाहर खदेड़ दिया गया. बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवारों के कुछ सदस्य घायल अवस्था में ओरछा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे हैं, जहां प्राथमिक इलाज जारी है.
घरों में तोड़फोड़, राशन और दस्तावेज जलाने के आरोप
घटना को लेकर सबसे गंभीर बात ये कही जा रही है कि मारपीट के बाद भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ. आरोप है कि ग्रामीणों ने दोनों परिवारों के कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचाया और उनकी छत तोड़कर सामान बिखेर दिए. इसके साथ ही घर में रखे राशन/खाद्यान्न, और महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड और जमीन के कागजात आदि को आग के हवाले करने का दावा भी किया जा रहा है. यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल हिंसा नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के सामने भोजन और पहचान का संकट भी खड़ा कर देता है.
“आमाबेड़ा जैसी घटना दोहराई गई”
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि ईकनार में जो कुछ हुआ, उसका पैटर्न हाल ही में सामने आए आमाबेड़ा मामले से मिलता-जुलता है. अंदरूनी इलाकों में धर्मांतरण को लेकर सामाजिक बहिष्कार, तनाव और हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने में दरार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
थाना प्रभारी मामले से अनजान
इस मामले पर ओरछा थाना प्रभारी धर्माराम तिर्की से जब एनडीटीवी संवाददाता ने फोन पर बात की तो बताया कि इस तरह का कोई मामला अब तक उनके संज्ञान में नहीं आया है. पुलिस रिकॉर्ड में शिकायत दर्ज नहीं होने की बात सामने आने के बाद मामले की पुष्टि और जांच को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.
“17 जनवरी की बैठक में गांव छोड़ने का फरमान सुनाया गया था”
वहीं, पीड़ित पक्ष से अस्पताल में इलाज करा रहे एक ग्रामीण का बयान सामने आया है. घायल ग्रामीण ने अपना नाम मानकू कमेटी बताया. उसने दावा किया कि 17 जनवरी को धर्मांतरण के मामलों को लेकर गांव में बैठक हुई थी, जिसमें संबंधित परिवारों को गांव छोड़ने का फरमान सुनाया गया था. पीड़ित के अनुसार उन्होंने इस आदेश का विरोध किया, जिसके बाद बुधवार को बड़ी संख्या में लोग आए और मारपीट कर घर में तोड़फोड़ की गई, उन्हें गांव से बाहर कर दिया गया.
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ईकनार की घटना के आरोपों ने जिला प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब मुख्य मुद्दे ये हैं कि पीड़ित परिवारों को सुरक्षा और राहत कैसे मिलेगी? उनके दस्तावेज व राशन नुकसान की भरपाई कैसे होगी? और यदि घटना की पुष्टि होती है, तो कानून हाथ में लेने वालों पर क्या वैधानिक कार्रवाई होगी? फिलहाल, क्षेत्र में तनाव की स्थिति बताई जा रही है और पूरे मामले में प्रशासनिक स्पष्ट व आधिकारिक जांच का इंतजार है.