Himanshi Sahu Success Story: प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, इस वाक्य को सच कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की होनहार बेटी हिमांशी साहू ने. कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली बुलबुल ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में कदम बढ़ाकर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. ग्राम सिवनी निवासी और सेजेस कन्नेवाडा में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत छात्रा हिमांशी साहू का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के प्रतिष्ठित युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम में हुआ है. राज्य में तीसरा स्थान हासिल करने वाली हिमांशी को जिला प्रशासन ने सम्मानित किया. वहीं स्कूल में भी गौरव समारोह आयोजित किया गया.
ISRO के प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में हुआ चयन
बालोद जिले की बेटी हिमांशी साहू ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल की है. ग्राम सिवनी निवासी और सेजेस कन्नेवाडा में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत हिमांशी पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही हैं. उन्होंने कक्षा 5वीं में 90 प्रतिशत और कक्षा 8वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी शैक्षणिक क्षमता का परिचय दिया था. लगातार मेहनत, नियमित अध्ययन और शिक्षकों के मार्गदर्शन के दम पर अब हिमांशी का चयन इसरो के प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम युविका में हुआ है, जहां उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और स्पेस टेक्नोलॉजी को करीब से सीखने का अवसर मिलेगा.

कलेक्टर ने सम्मानित किया
हिमांशी की इस उपलब्धि पर जिला प्रशासन ने भी सम्मान जताया. कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने संयुक्त जिला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में हिमांशी को प्रशस्ति पत्र, शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया.
हिमांशी साहू ने छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि हिमांशी की सफलता पूरे बालोद जिले के लिए गर्व की बात है और यह जिले के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी. इस दौरान हिमांशी के माता-पिता का भी सम्मान किया गया. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने छात्रा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दीं. वहीं स्कूल में आयोजित सम्मान समारोह में प्राचार्या, शिक्षकगण और विद्यार्थियों ने हिमांशी का उत्साह बढ़ाया. स्कूल परिवार ने इस सफलता को शिक्षा जगत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया.

'लगातार प्रयास से मिलती है सफलता'
हिमांशी ने कहा कि क्लास 6th में ओलंपियाड का एग्जाम दिलाया था और 8th में ताइक्वांडो के लिए स्टेट लेवल में सिलेक्शन हुआ था. जिसके बाद गाइड और रेड क्रॉस के लिए सलेक्शन हुआ था. मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरा चयन ISRO के प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम के लिए हुआ है, लेकिन इस चयन से मैं बहुत खुश हूं. वहीं अन्य बच्चों के लिए हिमांशी ने कहा कि हमें लगातार प्रयास करना चाहिए और प्रयास से ही सफलता मिलती है.
हिमांशी की इस सफलता पर उनके स्कूल के प्राचार्य ने कहा, 'मैं हिमांशी को बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने मेरे स्कूल और राज्य का नाम गौरव किया. इन छात्रों का ऑनलाइन टेस्ट हुआ, जिसमें हिमांशी का सिलेक्शन हुआ है. देश भर में 456 बच्चों का सिलेक्शन हुआ है, जिसमें बालोद जिले से हिमांशी शामिल है. यह ऑनलाइन प्रक्रिया होती है... इस प्रक्रिया के अंतर्गत बच्चों का चयन किया जाता है.
हिमांशी के माता पिता ने कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरी बेटी का चयन इसरो के प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम के लिए हुआ है.
हिमांशी की क्लास टीचर ने क्या कहा?
क्लास टीचर रितु विश्वकर्मा ने इस उपलब्धि पर हिमांशी को बधाई देते हुए कहा कि यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में उनका चयन हुआ जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है. बतौर शिक्षिका तो मुझे बहुत खुशी हुई है और स्कूल में भी हिमांशी सभी एक्टिविटी में हमेशा सक्रिय रही है. डिसिप्लिन हो या पढ़ाई... साइंस के मामले में भी काफी रुचि देखने को मिलती है. हिमांशी की उपलब्धि सभी बच्चों के लिए प्रेरणादायी है. हिमांशी की उपलब्धि आने वाले समय में अन्य बच्चों को प्रेरित करेगी.
लोगों के लिए प्रेरणा बनीं हिमांशी
गांव की बेटी हिमांशी साहू ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती.अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है. इसरो के युविका कार्यक्रम में चयन और कलेक्टर से सम्मान मिलने के बाद हिमांशी अब पूरे जिले की प्रेरणा बन गई हैं.
ये भी पढ़ें: Success Story: सफलता उम्र की मोहताज नहीं... 2nd क्लास की छात्रा ओजस्वी का कमाल, देगी 5वीं बोर्ड परीक्षा