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Success Story: गरीबी में बीता बचपन, सपनों के लिए छाना जंगल... फिर एक साथ मिली 2 सफलताएं, ऐसी है अजय की कहानी

Success Story: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के अजय गुप्ता ने गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की है. उन्होंने मेहनत के दम पर IFS परीक्षा में 91वीं रैंक हासिल की. अजय की सफलता आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

Success Story: गरीबी में बीता बचपन, सपनों के लिए छाना जंगल... फिर एक साथ मिली 2 सफलताएं, ऐसी है अजय की कहानी
Ajay Gupta Success Story: अजय गुप्ता के इस सफलता के बाद गांव में जश्न का माहौल है.

Ajay Gupta Success Story: छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक कहानी आज लोगों के दिल छू रही है. यह कहानी है रायगढ़ जिले के एक छोटे से गांव संबलपुरी के रहने वाले अजय गुप्ता (Ajay Gupta Success Story) की...अजय ने वो मुकाम हासिल किया है जिसका सपना हर कोई देखता है, लेकिन वहां तक कुछ ही लोग पहुंच पाते हैं. अजय के लिए यहां तक पहुंचने का रास्ता कांटों भरा था.

अजय गुप्ता का बचपन बाकी बच्चों जैसा नहीं था... जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब अजय तपती धूप में अपने माता-पिता के साथ जंगलों में तेंदू पत्ता तोड़ने पहुंचते थे. उनका पूरा परिवार इसी पर निर्भर था, लेकिन इस तंगहाली में भी अजय की आंखों में एक अलग सपना था और वो आईएफएस अधिकारी बनना.

अजय गुप्ता (Ajay Gupta) ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. संघ लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परीक्षा 2025 के परिणाम में अजय ने ऑल इंडिया रैंक 91 प्राप्त की है. इससे पहले वे यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में भी ऑल इंडिया रैंक 452 हासिल कर चुके हैं. लगातार दो प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता मिलने से गांव और जिले में खुशी का माहौल है.

कठिन परिस्थितियों में की पढ़ाई

रायगढ़ मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर जंगलों से घिरे संबलपुरी गांव में रहने वाले अजय साधारण किसान परिवार से आते हैं. उनके परिवार की आजीविका खेती-किसानी और मेहनत मजदूरी पर निर्भर रही है. ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े अजय ने सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई जारी रखी और कठिन परिस्थितियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.

NIT रायपुर से की पढ़ाई

हालांकि गरीबी कभी अजय के सपनों के आड़े नहीं आई. उन्होंने अपनी मेहनत से सबको हैरान कर दिया. अजय ने 10वीं क्लास में 92.66% और 12वीं में 91.40% मार्क्स लाकर अपनी काबिलियत साबित कर दी. उनकी इसी मेहनत की वजह से उन्हें NIT रायपुर में एडमिशन मिला, जहां स्कॉलरशिप की मदद से उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग पूरी की.

जंगलों में तोड़ते थे तेंदूपत्ता

अजय बचपन से ही पढ़ाई के साथ साथ परिवार के कामों में भी हाथ बंटाते थे. गर्मी के दिनों में वो अपने परिवार के साथ जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ने भी जाते थे, ताकि घर की आर्थिक स्थिति में सहयोग कर सकें. खेती और मेहनत के बीच उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा और लगातार तैयारी करते रहे.

एक नहीं, दो-दो बड़ी सफलताएं

29 साल के अजय ने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस की परीक्षा में पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की है. वो UPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी 452वीं रैंक पाकर अपनी जीत का परचम लहराया है.

अजय बताते हैं कि जब वो गांव में थे, तो उन्हें लगता था कि दुनिया बस वहीं तक है, लेकिन जब वो NIT पहुंचे, तब उन्हें एहसास हुआ कि वो भी बड़े सपने देख सकते हैं. बस्तर में रूरल डेवलपमेंट कार्य के दौरान उन्होंने इरादा और पक्का हो गया कि उन्हें फॉरेस्ट सर्विस में ही जाना है.

गांव में जश्न का माहौल

अजय की सफलता के बाद उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. परिवार, रिश्तेदार, मित्र और गांव के लोग उनकी उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं. जिले के कई सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी हैं.

संबलपुरी जैसे छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले अजय गुप्ता आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं.उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों के दम पर किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है.

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