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लापरवाही: 29 हजार क्विंटल धान का होना है उठान, 18 हजार ही केंद्रों में शेष, लाखों के नुकसान का जिम्मेदार कौन?

Chhattisgarh: समिति से कुल 29 हजार क्विंटल धान का उठाव होना है. मगर, केंद्र में 18 हजार क्विंटल धान ही मौजूद है. अब कलेक्टर ने नोडल अधिकारी को हटाने के लिए सहायक पंजीयन को पत्र लिखा है.

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लापरवाही: 29 हजार क्विंटल धान का होना है उठान, 18 हजार ही केंद्रों में शेष, लाखों के नुकसान का जिम्मेदार कौन?
समिति में बर्बाद हो रहे हैं हजारों क्विंटल धान

CG News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद (Gariaband) जिले में धान की खरीदी (Paddy purchased) खत्म होने के कई महीने बाद भी समितियां अब तक जीरो शार्टेज (Zero Shortage) नहीं कर पाए हैं. वर्तमान में केंद्रों पर 18 हजार क्विंटल धान मौजूद है. जबकि उठाव 29 हजार क्विंटल का होना है. लाटापारा, घूमरगुड़ा, चिचिया, बोरसी, भसेरा, परसदा कला, कुंडेलभाठा, जैसे केंद्रो में 1-1 हजार क्विंटल उठाव होना बाकी है. इसके अलावा 21 केंद्र ऐसे हैं, जिन्हें 200 क्विंटल से भी ज्यादा का धान उपलब्ध कराना हैं. इससे किसानों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. मामलै में कलेक्टर ने एक्शन लेते हुए नो़डल अधिकारी को हटाए जाने के लिए पत्र लिखा है.

कलेक्टर ने लिखा पत्र

गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने इस मामले को लेकर नोडल को हटाने के लिए सहकारिता पंजीयक को पत्र लिखा. जिसमें उन्होंने कहा है कि नोडल ने धान खरीदी की तैयारी, भौतिक सत्यापन, बारदाना व्यवस्था, भंडारण और सुरक्षा व्यवस्था में रुचि नहीं दिखाई. खरीदी के दरम्यान केंद्र वार नियंत्रित टोकन जारी करने के अलावा अंतिम निराकरण और पर्यवेक्षण के कार्य में लापरवाही बरती गई है. इसके पहले कलेक्टर ने इन्हीं लापरवाहियों को गिनाते हुए 9 अप्रैल को विभागीय सचिव के नाम पत्र लिखा था.

केंद्रों में कम है धान

केंद्रों में कम है धान

अब तक जीरो शार्टेज नहीं कर पाईं हैं समितियां

आपको बता दे कि वर्तमान में गरियाबंद जिले में 42 समितियां हैं, जो अब तक जीरो शार्टेज नहीं कर पाई हैं. इधर, धान खरीदी को लेकर राज्य शासन का निर्देश था कि केंद्रों में खरीदे गए धान का शत प्रतिशत उठाव हो जाए, ताकि समिति को शासन से मिलने वाले 37 प्रतिशत की कमीशन राशि उन्हें दिया जा सके. लेकिन, गरियाबंद जिले में शत प्रतिशत उठाव का मामला धान की कमी के कारण अब भी फंसा हुआ है. कलेक्टर दीपक अग्रवाल के निर्देश के बावजूद सहकारी समितियों ने अब तक जीरो शोर्टेज नहीं किया है. नाराज  कलेक्टर ने 1 मई को पंजीयक सहकारी संस्थाएं नवा रायपुर को पत्र लिख सहकारी विभाग द्वारा धान खरीदी नियंत्रण के लिए बनाए गए नोडल अधिकारी प्रहलाद पूरी गोस्वामी को हटाने के लिए पत्र जारी किया.

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समितियों से गायब है धान

सरकारी रिकार्ड के हवाले बताया गया कि 60 केंद्रों से 2 करोड़ कीमत के धान बोरा समेत गायब थे. इस खबर के बाद सहकारिता विभाग ने गायब बोरे को सुखत वजन में बदल दिया. जिला प्रशासन के सख्त रवैये के बाद समितियों ने मिलर से सांठगांठ कर गायब कुछ बोरों को उठाव दिखा कर मैनेज करने की कोशिश की. इस बीच, शासन ने आदेश जारी कर प्रत्येक केंद्र को 500 बोरा अतिरिक्त जारी करने की छूट दे दी. इसकी वजह रख-रखाव व ड्रेनेज की खामी के कारण बारिश में बोरे खराब होना बताया गया.

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