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Gariyaband: CBI जांच और गिरफ्तारी का झांसा देकर डॉक्टर से 6 लाख की ठगी, अधिवक्ता के खिलाफ FIR दर्ज

Chhattisgarh News: गरियाबंद में एक डॉक्टर से लाखों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है. आरोपी ने सीबीआई जांच और गिरफ्तारी की धमकी के नाम पर डॉक्टर से 6 लाख रुपये की वसूली की.

Gariyaband: CBI जांच और गिरफ्तारी का झांसा देकर डॉक्टर से 6 लाख की ठगी, अधिवक्ता के खिलाफ FIR दर्ज

Fraud in Gariyaband: गरियाबंद जिला अस्पताल में पदस्थ एक वरिष्ठ डॉक्टर से कथित रूप से सीबीआई जांच और गिरफ्तारी की धमकी देकर लाखों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है. ठगी का आरोप एक अधिवक्ता पर लगा है. फिलहाल पुलिस ठगी के इस मामले में आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

क्या है पूरा मामला?

डॉ. विपिन बिहारी अग्रवाल, जो जिला अस्पताल गरियाबंद में चिकित्सा विशेषज्ञ के पद पर मई 2022 से पदस्थ हैं. उन्होंने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने शिकायत में बताया कि उन्हें एक स्थानीय वकील राकेश मिश्रा ने जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान यह कहकर डरा-धमकाया कि उनके खिलाफ फार्मासिस्ट ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी के माध्यम से सीबीआई में शिकायत दर्ज की गई है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी हो सकती है.

मिश्रा ने दावा किया कि उसकी थाना गरियाबंद और सीबीआई में गहरी पकड़ है और वो 6 लाख रुपये लेकर मामले को सुलझा सकते हैं.

डॉक्टर से 6 लाख की वसूली करने का आरोप 

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, डर  के कारण, बार-बार फोन कॉल्स और मैसेज के चलते उन्होंने पहले 50,000 रुपये 'फोन पे' के जरिए ट्रांसफर किए और फिर 5.5 लाख रुपये चेक के माध्यम से मिश्रा के बताए गए खाते में जमा कर दिए. कुल मिलाकर डॉक्टर से 6 लाख की वसूली की गई.

कुछ महीने बाद हुआ खुलासा

कुछ महीनों बाद जब डॉक्टर को अपने विभागीय संपर्कों के माध्यम से पता चला कि उनके खिलाफ न तो कोई शिकायत और न ही कोई जांच चल रही है, तब उन्हें पूरे मामले की सच्चाई का एहसास हुआ और उन्होंने तुरंत थाना गरियाबंद में आवेदन देकर न्याय की मांग की.

आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज

गरियाबंद पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद पुष्टि की कि आरोपी अधिवक्ता ने डॉक्टर को झूठी जानकारी देकर ठगा है. पुलिस ने एडवोकेट राकेश मिश्रा के खिलाफ बीएनएस की धारा 308 (2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच शुरू कर दी है.

कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर कोई पेशेवर व्यक्ति किसी के खिलाफ जांच या गिरफ्तारी की धमकी देकर रकम वसूलता है, तो यह न केवल अपराध की श्रेणी में आता है, बल्कि बार काउंसिल के नियमों का भी उल्लंघन है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही आरोपी से पूछताछ की जाएगी और बैंक ट्रांजेक्शन व कॉल रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर लिया जाएगा.

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