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पीसीसी अध्यक्ष बैज ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- इस बार सिर्फ 139 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी 

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सियासत गरमा गई है. पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बार समर्थन मूल्य पर सिर्फ 139 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जबकि लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था.

पीसीसी अध्यक्ष बैज ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- इस बार सिर्फ 139 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी 

Chhattisgarh Paddy Procurement 2026: धान खरीदी को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. बैज का कहना है कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी समय से पहले रोक दी, जिससे हजारों किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने 165 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन खरीदी सिर्फ 139 लाख मीट्रिक टन तक ही सीमित रही. बैज के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार धान खरीदी कम हुई है.

पत्रकारवार्ता में उठाया धान खरीदी का मुद्दा

दीपक बैज ने पत्रकारवार्ता में कहा कि इस बार धान खरीदी को लेकर किसानों में लगातार असमंजस और नाराजगी रही. उनके अनुसार, सरकार ने शुरुआत से ही ऐसी व्यवस्था बनाई, जिससे किसान आसानी से अपना धान न बेच सकें. बैज ने इस पूरे मामले को किसानों के हितों के खिलाफ बताया.

समर्थन मूल्य पर खरीदी बंद करने का आरोप

बैज का आरोप है कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बंद कर दी है. उन्होंने कहा कि इस साल केवल 53 दिन तक ही धान खरीदी की गई, जबकि किसानों को उम्मीद थी कि प्रक्रिया पूरी अवधि तक चलेगी, ताकि हर किसान को अपनी उपज बेचने का मौका मिल सके.

लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन, खरीदी सिर्फ 139 लाख

बैज ने आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का था, लेकिन वास्तविक खरीदी 139 लाख मीट्रिक टन ही हुई. उन्होंने इसे सरकार की नाकामी बताया और कहा कि इतने बड़े अंतर का जवाब सरकार को देना चाहिए.

9 लाख मीट्रिक टन की गिरावट का दावा

दीपक बैज के मुताबिक, पिछले साल 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था. इस बार, उनके दावे के अनुसार, पिछले साल की तुलना में करीब 9 लाख मीट्रिक टन धान कम खरीदा गया. उन्होंने कहा कि यह गिरावट बताती है कि इस साल खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए पहले से ज्यादा मुश्किल रही.

पंजीयन की समस्या: 27 लाख पंजीकृत, 5 लाख रह गए

बैज ने बताया कि लगभग 27 लाख किसानों का पंजीयन था, लेकिन करीब 5 लाख किसान एग्रटेक पोर्टल में पंजीयन नहीं करा पाए. उन्होंने कहा कि तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी दिक्कतों के कारण कई किसान सिस्टम से बाहर रह गए, जिसका नुकसान उन्हें सीधे तौर पर झेलना पड़ा.

टोकन को लेकर गड़बड़ी: बैज 

बैज ने दावा किया कि कई किसानों को टोकन नहीं मिला. वहीं, कई किसानों को टोकन मिलने के बाद भी खरीदी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि किसान मंडियों और केंद्रों के चक्कर काटते रहे, लेकिन उनकी उपज नहीं ली गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अपमान भी सहना पड़ा.

सरकार पर “षड्यंत्र” का आरोप

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार शुरू से ही यह चाहती रही कि किसानों को धान बेचने में दिक्कत हो और सरकार को धान न खरीदना पड़े. उन्होंने इसे किसानों के खिलाफ एक “षड्यंत्र” बताया और कहा कि नीति और व्यवस्था दोनों स्तर पर किसानों को उलझाया गया.

29 जिलों में कम खरीदी का दावा

दीपक बैज के अनुसार, पिछले साल की तुलना में चार जिलों को छोड़ दें तो 29 जिलों में धान खरीदी कम हुई है. उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि समस्या सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्य के बड़े हिस्से में किसानों को परेशानी हुई है.

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