छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का नारायणपुर प्रवास जिले के इतिहास में एक बहुआयामी और प्रतीकात्मक संदेश लेकर आया. यह दौरा जहां आत्मसमर्पण नीति के तहत पूर्व नक्सलियों के सामाजिक पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत का साक्षी बना, वहीं आदिवासी संस्कृति, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय विरासत के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है. मुख्यमंत्री के इस प्रवास में सामाजिक बदलाव, सांस्कृतिक चेतना और विकास की एक सशक्त तस्वीर उभरकर सामने आई.
पूर्व नक्सलियों का विवाह, समाज की मुख्यधारा में वापसी
मुख्यमंत्री के नारायणपुर आगमन के दौरान आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम में आत्मसमर्पण कर चुके चार पूर्व नक्सली जोड़ों ने विधि-विधान से सात फेरे लेकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत की. कभी अबूझमाड़ के जंगलों में भय और दहशत का प्रतीक रहे ये पूर्व नक्सली अब समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं.
इन जोड़ों में रंजीत-कोशी, सुखलाल-कमला गोटा, मासो मांडवी–रीता कवासी और सनी राम-सुशीला शामिल हैं. आत्मसमर्पण के बाद शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें आवास, राशन, आजीविका और अन्य सुविधाएं मिलीं, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है.
घोटुल भ्रमण, आदिवासी संस्कृति से साक्षात्कार
इसी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने गढ़बेंगाल स्थित ऐतिहासिक घोटुल का भ्रमण किया. मांदरी की थाप और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच मुख्यमंत्री ने घोटुल की इको-फ्रेंडली संरचना और बारीक नक्काशी की सराहना की, जिसे पद्मश्री काष्ठ कलाकार पंडीराम मंडावी ने उकेरा है.
मुख्यमंत्री ने पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद मांझी, पंडीराम मंडावी और अन्य लोककलाकारों से भेंट कर उनके योगदान की प्रशंसा की और घोटुल को आदिवासी समाज का शैक्षणिक व संस्कार केंद्र बताया.
ग्रामीण बस में सवार होकर कुरुसनार पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की बस में सवार होकर नारायणपुर से अबूझमाड़ के सुदूर ग्राम कुरुसनार पहुंचे. यहां उन्होंने स्कूली बच्चों से संवाद कर शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली.
बच्चों ने गोंडी भाषा में गीत प्रस्तुत किए और आधुनिक शिक्षा से जुड़े मॉडलों की जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनके साथ सामूहिक फोटो भी खिंचवाई.
महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी
कुरुसनार के बालक आश्रम छात्रावास परिसर में आयोजित कार्यक्रम में अबूझमाड़िया समाज द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया गया. इसी मंच से मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी की.
इसके तहत नारायणपुर जिले की 27 हजार 272 महिलाओं के खातों में 2 करोड़ 72 लाख 72 हजार रुपए और प्रदेशभर में कुल 641.34 करोड़ रुपए डीबीटी के माध्यम से अंतरित किए गए.
बस्तर पंडूम में जनजातीय गौरव का भव्य प्रदर्शन
नारायणपुर के हाई स्कूल ग्राउंड में आयोजित बस्तर पंडूम जिला स्तरीय कार्यक्रम ने जनजातीय गौरव को भव्य मंच प्रदान किया. पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य, वाद्ययंत्र, खान-पान, औजार और पेय पदार्थ सहित 12 विभिन्न विधाओं में प्रतियोगिताएं और प्रदर्शनियां आयोजित की गईं.
ताड़, छिंद और सल्फी के पत्तों से सुसज्जित मंच, आदिवासी साहित्य संग्रहण, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और पारंपरिक बीजों की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप और प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रतिभागियों की सराहना की.
समावेशी विकास का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का नारायणपुर प्रवास यह संदेश देता है कि छत्तीसगढ़ में विकास केवल भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक पुनर्वास, सांस्कृतिक संरक्षण, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के साथ आगे बढ़ रहा है. आत्मसमर्पित नक्सलियों का नवजीवन, घोटुल में सजी आदिवासी विरासत, कुरुसनार में बच्चों का उत्साह और बस्तर पंडूम की भव्यता मिलकर एक शांत, समावेशी और सशक्त बस्तर की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं.