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वेदांता प्लांट हादसे में 20 की मौत, परिवारों के पास सिर्फ दुख और यादें, कई घरों पर रोजी-रोटी का संकट

Vedanta Power Plant Blast in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को बॉयलर का ट्यूब फटने से बड़ा हादसा हो गया. अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है और 16 गंभीर रूप से घायल हैं.

वेदांता प्लांट हादसे में 20 की मौत, परिवारों के पास सिर्फ दुख और यादें, कई घरों पर रोजी-रोटी का संकट

Vedanta Power Plant Boiler Blast: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है. 14 अप्रैल को दोपहर में बॉयलर का ट्यूब फटने से गंभीर रूप से घायल हुए 16 मजदूर अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं. वहीं, रायगढ़ के अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन गुरुवार को मुलाकात करेंगे. वेदांता पावर प्लांट हादसे ने कई परिवारों के सामने दुखों का पहाड़ लाकर खड़ा कर दिया. कई परिवार ऐसे हैं, जिनके घर में रोजी-रोटी कमाने वाले इकलौते शख्स ने जान गंवाई है. मृतकों में बहुत से मजदूर पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड के रहने वाले हैं. प्रत्यक्षदर्शियों ने धमाके के उस पल को किसी प्रलय से कम नहीं बताया.

पहले चाचा को खोया, अब भाई चला गया

भागलपुर (बिहार) के संतोष कुमार के लिए यह हादसा यह दुख और परिवार में एक और गम लेकर आया. उन्होंने बताया कि हमने इस हफ्ते की शुरुआत में ही अपने चाचा को खोया था. अब भाई रितेश भी हमें छोड़कर चला गया.

संतोष कहा कि 42 साल के रितेश कुमार ने तीन महीने पहले ही इस संयंत्र में काम शुरू किया था और अपने तीन बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का सपना देखा था. अब वह उन्हें बड़ा होते देखने के लिए मौजूद नहीं होंगे. इस घटना के बाद, अफरा-तफरी और दुख ने परिवारों की तकलीफ और बढ़ा दी. कई लोग अपने प्रियजनों की तलाश में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे.

अस्पताल में भाई की घंटों तलाशी, लेकिन...

सानी कुमार अनंत ने रायगढ़ के पांच अस्पतालों में अपने भाई रामेश्वर महिलांगे (29) की तलाश में घंटों बिताए. रामेश्वर भी इस हादसे में मारे गए लोगों में शामिल हैं. अनंत ने कहा कि कोई मुझे कुछ भी नहीं बता पाया. उनका एक छोटा बच्चा है. अब उनके परिवार की देखभाल कौन करेगा?

बच्चों को छोड़ गए उदय राम के दामाद

झारखंड से घटना की खबर सुनकर तुरंत रायगढ़ पहुंचे उदय राम को भी ऐसी ही मुश्किल का सामना करना पड़ा. उनके दामाद, उत्तर प्रदेश के रहने वाले बृजेश कुमार ने मार्च में ही इस संयंत्र में काम शुरू किया था और बृजेश के एक और दो साल के दो छोटे बच्चे हैं. उदय राम ने कहा कि हमें बताया गया था कि वह रायगढ़ के जिंदल अस्पताल में हैं. जब हम वहां गए तो हमें बताया गया कि उनके शव को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भेज दिया गया है, लेकिन वहां भी, किसी ने हमें कुछ नहीं बताया.

ऐसा लगा जैसे मिसाइल गिरी हो

पश्चिम बंगाल के एक पेंटर अजीत दास कर ने कहा कि धमाका ऐसा लगा, जैसे कोई मिसाइल आकर गिरी हो. कुछ ही सेकंड में पूरे इलाके में घना धुआं फैल गया. अजीत दास ने बताया, ''हमने अभी-अभी अपना दोपहर का खाना खत्म ही किया था कि यह हादसा हो गया. हम करीब 17 मीटर की ऊंचाई पर काम कर रहे थे. धमाका नीचे बॉयलर से हुआ था. मैं एक अलमारी के अंदर छिपकर बच गया. जो लोग नीचे थे, वे बुरी तरह जल गए थे. मैं अपनी पूरी जिंदगी इस घटना को नहीं भूलूंगा.''

बंगाल में वोट डालने का किया था वादा

पश्चिम बंगाल निवासी शेख सैफुद्दीन (40) ने परिवार से जल्द ही वापस लौटने और विधानसभा चुनाव में वोट डालने का वादा किया था, जो अब कभी पूरा नहीं हो सकेगा. छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई गांव में स्थित वेदांता विद्युत संयंत्र में हुए भीषण धमाके में मारे गए 20 मजदूरों में सैफुद्दीन भी शामिल थे. इस घटना ने कई राज्यों में कई परिवारों को उजाड़ दिया है.

सैफुद्दीन के भाई रफीक ने बताया, ‘‘हमारे गांव के किसी व्यक्ति ने मुझे बताया कि सैफुद्दीन की तबीयत खराब है और वह आईसीयू में भर्ती हैं. मैं आधी रात को कार से निकला और बुधवार दोपहर तक यहां पहुंच गया. जब तक पहुंचा तब तक सैफुद्दीन इस दुनिया से जा चुके थे.'' सैफुद्दीन पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया के रहने वाले थे.

आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले सैफुद्दीन ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए मजदूरी करते हुए जम्मू से लेकर केरल और ओडिशा तक देश के विभिन्न हिस्सों में कई साल बिताए थे. रफीक ने बताया कि वह कुछ ही महीने पहले छत्तीसगढ़ आए थे, जहां वह महीने के 20 से 25 हजार रुपये कमा रहे थे.

उनकी पत्नी का दो साल पहले बीमारी के कारण निधन हो गया था. उसके बाद अकेले उनके ही कंधों पर अपने दो बच्चों बेटी (18) और बेटे (17) की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई थी. दोनों बच्चे अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं. रफीक ने बताया कि हाल में उन्होंने अपने बेटे के ‘अपेंडिक्स' के ‘ऑपरेशन' पर पांच हजार रुपये खर्च किए थे.

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