डीईओ ऑफिस में आग पर गरमाई सियासत, भाजपा ने बताया भ्रष्टाचार छुपाने की कांग्रेसी साजिश

DEO Office Fire Raipur: बीजेपी से रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा का कहना है कि कांग्रेसियों ने जिला शिक्षा कार्यालय में आग लगाई है. ये आग 5 साल के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए लगाई गई. लिहाजा, कांग्रेसियों के आग लगाने के एंगल से जांच होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेसी खुद आग लगाकर अब भ्रष्टाचार का हंगामा कर रहे हैं.

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Raipur DEO Office Firebreakout: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में आग लगने के मामले में सियासत गर्म हो गई है. भाजपा विधायक ने कांग्रेस पर डीईओ कार्यालय में आग लगवाने का आरोप लगाया है. वहीं, बीजेपी (BJP) के आरोपों पर कांग्रेस (Congress) ने भी पलटवार किया है.

दरअसल, 17 जनवरी की रात छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला शिक्षा कार्यालय के एक भवन में अचानक तेज आग लग गई. जिस भवन में आग लगी, वहां कई सालों के दस्तावेज रखे हुए थे, जो आगजनी में जलकर खाक हो गए. आगजनी की घटना की जांच के लिए सरकार ने तीन सदस्य कमेटी का गठन कर दिया है.  जांच शुरू भी कर दी गई है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में लगी इस आज की गर्माहट अब छत्तीसगढ़ की सियासत में भी महसूस की जा रही है.

भाजपा विधायक ने लगाए ये गंभीर आरोप

बीजेपी से रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा का कहना है कि कांग्रेसियों ने जिला शिक्षा कार्यालय में आग लगाई है. ये आग 5 साल के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए लगाई गई. लिहाजा, कांग्रेसियों के आग लगाने के एंगल से जांच होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेसी खुद आग लगाकर अब भ्रष्टाचार का हंगामा कर रहे हैं.

'कांग्रेस फोबिया से ग्रसित हैं भाजपाई'

कांग्रेस पर लगे इस गंभीर आरोप का पार्टी ने सियासी अंदाज में किया है. कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार को दबाने के लिए इस तरह से ऊल जलूल आरोप लगाए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर का कहना है कि भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा को कांग्रेस फोबिया हो गया है. भाजपा सरकार के कारनामों को छुपाने के लिए इस तरह के उलजुलूल आरोप कांग्रेस पर लगाया जा रहे हैं.

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कांग्रेस ने पुरानी घटना भी दिलाई याद

पुरंदर मिश्रा ने कुछ दिन पहले कांग्रेस पर उस वीडियो को बनाने का आरोप भी लगाया था, जिसमें भाजपा के बड़े नेताओं की ओर से 1500 करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोप थे, लेकिन जब जांच हुई, तो पता चला कि इसमें बीजेपी के लोग ही शामिल हैं. लिहाजा, आगजनी मामले की भी गंभीरता से जांच कर लेनी चाहिए.

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हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में आग कैसे लगी? क्या यह किसी षड्यंत्र का हिस्सा था? इन सारे सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेंगे, फिलहाल इस पर राज्य में सियासी पारा गरम है.

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