प्यार, अपनापन और ममता की कोई सरहद नहीं होती. छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिला कांकेर में इस बात का एक बेहद खूबसूरत और मानवीय उदाहरण देखने को मिला है. यहाँ एक 7 महीने के बेसहारा मासूम को न सिर्फ नया परिवार मिला है, बल्कि अब उसका पालन-पोषण और भविष्य सात समंदर पार दुबई की चकाचौंध में संवरेगा. दुबई में रहने वाले अप्रवासी भारतीय (NRI) दंपति निखिल और स्नेहा सतवानी ने इस बच्चे को गोद लेकर उसे माता-पिता का सच्चा प्यार और एक बेहतर जीवन देने का फैसला किया है.
चार साल बाद आंगन में गूंजी किलकारी
निखिल और स्नेहा लंबे समय से माता-पिता बनने और एक बच्चे का जीवन संवारने की चाहत रख रहे थे. इसके लिए उन्होंने साल 2022 में 'केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण' (CARA) में कानूनी तौर पर अपना पंजीकरण कराया था. लगभग चार साल के लंबे और कड़े इंतजार के बाद आखिरकार उनके जीवन में यह बड़ी खुशी आई है. कांकेर की विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी में रह रहे इस शिशु को जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आधिकारिक तौर पर दंपति को सौंप दिया.
दत्तक ग्रहण एजेंसी की बड़ी कामयाबी
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित यह विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी अब तक 60 अनाथ और बेसहारा बच्चों को नया परिवार दिलाकर उनका जीवन संवार चुकी है. राहत और खुशी की बात यह है कि इन बच्चों में से कुल 8 बच्चों को विदेशी और एनआरआई (NRI) दंपत्तियों ने गोद लिया है. प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, दत्तक ग्रहण की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित और निशुल्क है.
बच्चे को अपनी गोद में पाकर भावुक हुए पिता निखिल सतवानी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि "मेरी और मेरी पत्नी की लंबे समय से बच्चा गोद लेने की चाह थी, जो अब जाकर पूरी हो गई है. इसके लिए भगवान का लाख-लाख शुक्रिया."
वहीं, पूरी कानूनी प्रक्रिया पर बात करते हुए महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी विपिन जैन ने बताया कि "बच्चा गोद देने की इस पूरी कार्रवाई में विभाग की तरफ से सभी नियमों की पूरी तरह से पालना की गई है और पूरी पारदर्शिता बरती गई है."
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