Chhattisgarh High Court के चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने 2010 के चर्चित Tadmetla Naxal Attack मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को दिए गए बरी के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा. कोर्ट ने टिप्पणी की कि 76 जवानों की शहादत वाले इतने गंभीर मामले, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा, उसमें भी जांच एजेंसियां कानूनी रूप से स्वीकार्य और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं.
राज्य की ओर से महाधिवक्ता Vivek Sharma और उप महाधिवक्ता Saurabh Pandey ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी बरसे लखमा के धारा 164 CrPC के तहत दिए गए इकबालिया बयान पर उचित विचार नहीं किया. उन्होंने यह भी कहा कि बम निरोधक दस्ते द्वारा निष्क्रिय किए गए पाइप बमों और विस्फोटकों की जब्ती को नजरअंदाज किया गया. राज्य ने धारा 311 CRPC के तहत सात घायल CRPF जवानों को गवाह के रूप में पेश करने की अनुमति खारिज किए जाने पर भी आपत्ति जताई. वहीं, आरोपियों की ओर से अधिवक्ता Ishwar Jaiswal ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे.
हाईकोर्ट ने जांच में गिनाईं कई खामियां
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने 43 गवाहों और 156 दस्तावेज पेश किए, लेकिन अधिकांश गवाह अपने बयानों से मुकर गए. कोर्ट ने कहा कि किसी भी गवाह ने आरोपियों की स्पष्ट पहचान नहीं की. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर सुप्रीम कोर्ट के Sharad Birdhichand Sarda v. State of Maharashtra फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों की श्रृंखला अधूरी रही और आरोपियों का किसी आतंकवादी संगठन या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से सीधा संबंध साबित नहीं हो सका. कोर्ट ने यह भी कहा कि घटनास्थल से मिले विस्फोटकों को आरोपियों के कब्जे से बरामद नहीं किया गया था. सबसे अहम बात यह रही कि एफएसएल रिपोर्ट पेश ही नहीं की गई, जिससे जब्ती संबंधी साक्ष्य कमजोर पड़ गए. इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत अभियोजन स्वीकृति और आरोपियों की शिनाख्ती परेड नहीं कराए जाने को भी गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटि माना गया.
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घटना 6 अप्रैल 2010 की है, जब सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन और पुलिस बल ताड़मेटला इलाके में एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग पर थे. इसी दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला कर दिया था. इस भीषण हमले में 76 जवान शहीद हो गए थे, जिसे देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है.
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