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This Article is From Jun 14, 2025

Shocking News: बाथरूम में नाबालिग ने बच्चे को दिया जन्म; टॉयलेट में फेंकने से मौत, पुलिस जांच जारी

Dantewada News: पुलिस के अनुसार यह मामला गंभीर है. अधिकारी इसे कई एंगल से देख रहे हैं. क्या यह मामला नाबालिग से यौन शोषण का है? हॉस्टल प्रबंधन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? छात्रा गर्भवती कैसे हुई? पुलिस इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है.

Shocking News: बाथरूम में नाबालिग ने बच्चे को दिया जन्म; टॉयलेट में फेंकने से मौत, पुलिस जांच जारी
Dantewada News: दंतेवाड़ा में बाथरूम में नाबालिग ने शिशु को दिया जन्म, उठे कई सवाल

Dantewada News: दंतेवाड़ा जिले से एक बेहद ही हैरान करने वाला मामला उजागर हुआ है. जिले के कटेकल्याण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महज 13 साल की एक नाबालिग छात्रा ने उपचार के दौरान अस्पताल के बाथरूम में एक नवजात को जन्म दे दिया. जिसके बाद लोक लाज के भय से नव जन्मे मासूम को टॉयलेट सीट (कमोड) के अंदर फेंक दिया. टॉयलेट के अंदर गिरने से नवजात बच्चे की मौत हो गयी. वहीं इस मामले में दंतेवाड़ा पुलिस पड़ताल में जुटी है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर नाबालिग छात्रा जो कक्षा 7वीं में पढ़ती है, वह प्रेग्नेंट कैसे हुई? और मासूम नवजन्मे बच्चे की मौत किस तरह से हुई है.

क्या है मामला?

इस मामले में जिला प्रशासन यह कर इस मामले पल्ला झाड़ने में लगा है कि नाबालिग छात्रा ग्रीष्म अवकाश (समर वैकेशन) में घर गयी थी. तो वही दूसरी तरफ आवासीय विद्यालयों में आदिवासी छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं.

यह सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद न केवल छात्रा की मानसिक स्थिति पर सवाल उठे हैं, बल्कि छात्रावास और स्कूल प्रशासन की गंभीर लापरवाही भी कटघरे में आ गई है. इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है.

छात्रा की मां मितानिन है. मितानिन तो गर्भवती माताओं पर ही काम करती है. वह भी कह रही है कि मालूम नहीं था कि उसकी बेटी गर्भवती है. बेटी से जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कटेकल्याण का ही लड़का है. हालांकि पुलिस के मामला संज्ञान में आया है अभी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

दंतेवाड़ा के एकलव्य आवासीय विद्यालय मे छात्रा अध्यनरत थी. वह कक्षा सातवीं की परीक्षा देकर अपने  गांव चली गई थी. वह गांव से वापस भी नहीं आई थी. सवाल यहां पर उठता है कि संस्था प्रबंधन पर कि रुटीन चेकअप के बाद भी छह माह का गर्भ स्वास्थ्य विभाग की टीम क्यों नही पकड़ सके? क्या संस्था ने मामले को दबाने के लिए पर्दा डाल दिया? आदिवासी विकास विभाग का सीधा हस्तक्षेप होने के बाद  भी अधिाकारी कह रहे हैं एकलव्य संस्था उनके अधीन नहीं है.

बेहतर इलाज के लिए जगदलपुर रेफर किया गया

मेडिकल ऑफिसर प्रयंका सक्सेना ने बताया कि उसे कटेकल्याण से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिजन ने और वहां के स्टॉफ ने कहा था बुखार और सांस में दिक्कत हो रही है. उसी आधार पर ईलाज चल रहा था. इस दौरान उसको ब्लीडिंग भी हो रही थी. सोनोग्राफी और अन्य जांच करवाई गई तो पता चला कि उसने एक बच्चे को जन्म दिया है. इसके बाद उसका प्रॉपर इलाज शुरू किया गया. छात्रा अभी नागालिग है. हीमोग्लोबिन बेहद कम था. छह ग्राम से भी काम हो गया था. उसको साथ ही पीलिया के भी लक्षण थे. उसे बेहतर इलाज के लिए जगदलपुर रेफर किया गया है.

पुलिस ने क्या कहा?

एसपी गौरव राय कहते है बेहद गंभीर मामला है. सभी बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है. नवजात बच्चे का पोस्टमार्टम करवाया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का सबब स्पष्ट होगा. मामले की गहराई से  जांच की जा रही है. आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा. साथ ही जो भी तथ्य सामने आएगें उस आधार पर भी कार्रवाई की जाएगी.

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