कमिश्नर हरिनायणचारी मिश्र : बिहार के छोटे से गांव से भोपाल के कमिश्नर तक का सफर

भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र का करियर बेहद शानदार रहा है. बिहार के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है जो बेहद प्रेरणादायी भी है. आप भी जानिए अपने अफसर को

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मध्यप्रदेश में जब दूसरी बार कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत हुई तो हरिनारायणचारी मिश्र को इंदौर जैसे अहम कमिश्नरी का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया था. 2003 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हरिनारायणचारी ने अब तक के कैरियर में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की है लेकिन संजीवनी हेल्प लाइन की शुरुआत करना वे अपनी अहम उपलब्धि बताते हैं. जबलपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने इस हेल्पलाइन की शुरूआत की और फिर ये सिलसिला चल निकला. उसके बाद ग्वालियर और फिर इंदौर. शहरों की लिस्ट काफी लंबी है लेकिन इस हेल्पलाइन ने हजारों लोगों की जान बचाई है. दरअसल संजीवनी हेल्प लाइन काफी चर्चित सेवा है.

खुद हरिनारायणचारी के मुताबिक किसी भी शहर में जितने लोगों की हत्या नहीं होती उससे लगभग चार गुना लोग सुसाइड करते हैं. ये हेल्पलाइन लोगों को सुसाइड से बचाती है.

हेल्पलाइन में फोन करने वाले लोगों का नाम गोपनीय रखा जाता है और उसकी काउंसलिंग की जाती है. इंदौर में तैनाती के दौरान कमिश्नर साहब ने गुंडे-बदमाशों पर भी नकेल कसी थी. उनके निर्देश पर पहले तो हर थाने के 10 सबसे टॉप गुंडों की लिस्ट बनाई गई फिर उनके अवैध अतिक्रमण को तोड़ दिया गया. शुरुआती दौर में 200 से ज्यादा मकान तोड़ गए. 

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बिहार के गांव से कमिश्नर तक का सफर

बिहार के सीवान जिले के छोटे से गांव रघुनाथपुर से ताल्लुक रखने वाले हरिनारायणचारी की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई. 12 वीं तक रघुनाथपुर में ही पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बीएचयू में दाखिला लिया. PG करने के साथ ही उन्होंने 1998 में PCS का परीक्षा पास की और उत्तर प्रदेश में ट्रेजरी अधिकारी बन गए. इसके बाद साल  2001 में IRTS पास कर रेलवे अधिकारी बन गए. रेलवे की नौकरी करते हुए उन्होंने UPSC की तैयारी की. इसके बाद अगले साल यानी 2002 में UPSC का परीक्षा दिया. इसके बाद 2003 में आए परीक्षा परिणाम में वे IPS बन गए और उन्हें मध्यप्रदेश राज्य का कैडर मिला.  

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ऐसा है भोपाल में डेली रूटीन

हरिनारायणचारी बताते हैं कि सुबह जल्दी उठने के बाद थोड़ा व्यायाम करता हूं, उसके बाद सुबह का एक बड़ा हिस्सा फ़ोन पर चला जाता है. उनके मुताबिक रिपोर्टिंग का एक काम पुलिस प्रणाली में भी होता है जिसमें आप 24 घंटे की समीक्षा करते हैं. सभी अधिकारियों से सुबह बात करनी होती है तो उसमें काफी वक्त निकल जाता है. उसके बाद अखबार, ख़बरें देखते हैं, फिर ऑफिस आने की तैयारी शुरू कर देते हैं. दिन भर दफ्तर में रहने के बाद शाम को अगर वक्त मिले तो टेनिस भी खेल लेते हैं. 

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'वर्क कल्चर' पर फंडा क्लीयर है

हरिनारायणचारी बताते हैं कि पुलिस में हर जगह के हिसाब से वर्क कल्चर अलग होता है. जैसे हम बालाघाट देखें जो नक्सल प्रभावित जिला है, वहां अलग तरह की प्रॉब्लम है. वहां जोर आंतरिक सुरक्षा पर है. लिहाजा हर जगह के लिए अलग रणनीति बनानी होती है. हालांकि सरकारी सेवा में हर विभाग का साथ मिलना जरूरी है. उनका कहना है कि समाज में हर तरह के लोग होते हैं. कुछ लोग परीक्षा पास करके टेबल के इस तरफ आ जाते हैं कुछ उस तरफ रह जाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप ईश्वर में आस्था रखें और किसी भी चुनौती के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें.