Bhopal High-Tension Road: भोपाल में विकास अब सीधा नहीं चलता, वह कोण बनाकर चलता है. पहले ऐशबाग का 90 डिग्री वाला पुल आया, फिर ठिगने क़द का मेट्रो स्टेशन और अब करोंद में राजधानी ने अपना 'एफिल टॉवर' खड़ा कर दिया है. फर्क बस इतना है कि पेरिस का टॉवर लोग दूर से निहारने जाते हैं, जबकि भोपाल के करोंद स्थित इस टॉवर के नीचे से लोग अपनी जान हथेली पर रखकर गुजरने को मजबूर हैं. कुल मिलाकर भोपाल अब राजधानी नहीं रहा, प्रयोगशाला हो गया है. यहां देखा जाता है कि नागरिक कितनी बिजली सह सकते हैं. करोंद में हाईटेंशन टावर के नीचे से सड़क निकाल दी गई है ताकि आदमी को हमेशा याद रहे कि वह नीचे है और व्यवस्था ऊपर.