भोपाल के जैन मंदिरों में विनयांजलि सभा का आयोजन, देश भर में दी जा रही आचार्य श्री को श्रद्धांजलि

आचार्य श्री के देवलोक गमन को एक सप्ताह पूरा हो गया है. इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ देश के कोने-कोने में जैन मंदिरों में विनयांजलि महासभा (Vinyanjali Mahasabha) का आयोजन किया जा रहा है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जैन मंदिरों (Bhopal Jain Mandir) में भी विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया.

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Bhopal News: जैन समाज के महान संत आचार्य विद्यासागर महाराज (Vidhyasagar Maharaj) ने बीते रविवार 18 फरवरी को देह त्याग दी थी. आचार्य श्री को जैन धर्म (Jain Muni) की परंपरा संलेखना के अनुसार पंचतत्व में विलीन किया गया. रविवार को आचार्य श्री के देवलोक गमन को एक सप्ताह पूरा हो गया. इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ देश के कोने-कोने में जैन मंदिरों में विनयांजलि महासभा (Vinyanjali Mahasabha) का आयोजन किया जा रहा है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जैन मंदिरों (Bhopal Jain Mandir) में भी विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें जैन समाज के सभी लोग उपस्थित रहे. आचार्य श्री की तस्वीर के सामने दीप प्रज्जवलन किया गया और गुरुदेव को याद किया गया.

सकल दिगम्बर जैन समाज के लोगों ने सभा के पहले पदयात्रा निकाली, जिसमें युवाओं के साथ-साथ बच्चे, बुज़ुर्ग और महिलाएं ढोल-नगाड़ों के साथ झूमती-गाती नज़र आईं. पदयात्रा में युवाओं ने आचार्य श्री के जयकारे लगाए.

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जैन समाज ने उक्त आयोजन में पूज्य आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के विनयांजलि कार्यक्रम में सामान्य नागरिकों, गुरू भक्तों और आम-ओ-ख़ास सभी प्रकार के लोगों को आमंत्रित किया था. सभा में मौजूद निवाड़ी विधायक अनिल जैन ने NDTV से बातचीत की और आचार्य गुरुदेव को भारत रत्न देने की मांग की.

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दिगंबर जैन मुनि परंपराओं के आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने विभिन्न समाज और धर्म के लोगों के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ी है. जैन धर्म के प्रवर्तक होने के बावजूद उन्होंने सर्व धर्म का संदेश लोगों को दिया इसीलिए न सिर्फ जैन धर्म के अनुयायी बल्कि सभी धर्मों के लोग आचार्य श्री पर गहरी आस्था रखते हैं. आचार्य विद्यासागर जी महाराज के देह त्यागने के बाद लोगों में शोक की लहर है. आचार्य श्री की संलेखना की खबर सुनकर सोशल मीडिया पर पीएम मोदी समेत अन्य नेताओं ने श्रद्धांजलि दी थी और शोक व्यक्त किया था. जैन समुदाय के साथ ही अन्य विभिन्न समुदाय के लोगों ने भी गुरुदेव को लेकर अपना दुख व्यक्त किया था. 

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