विदिशा : मुर्दों को भी पार करनी पड़ती है नदी, सिस्टम की अनदेखी के शिकार एक गांव की कहानी

इस गांव में कब्रिस्तान और श्मशान पहुंचने के लिए एक ही रास्ता है बारिश के दिनों में यहां की नदी का पानी चढ़ जाता है तो इस तरह की परिस्थिति सामने आ जाती है. इस दौरान किसी की मौत हो जाए तो उसकी अर्थी या जनाजा उफनती नदी में से निकालना पड़ता है.

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करारिया गांव, विदिशा जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है, सरकारी सिस्टम की नाकामी कहे या सरकार की अनदेखी कि गांव वालों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है
विदिशा:

विकास के लाख दावे किए जाएं लेकिन इन दावों की पोल खोलने के लिए एक तस्वीर ही काफी है. विदिशा जिला मुख्यालय से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव में जनाजे को कब्रिस्तान ले जाने के लिए भी नदी पार करनी पड़ती है.
आपने, अपने घर, कॉलेज या बाजार पहुंचने के लिए नदी पार करके जाने की तो बहुत खबरें सुनी, पढ़ी हैं लेकिन मरने के बाद भी आपको नदी पार करके अपनी आखिरी मंजिल पर जाना होगा. इस तरह के हालात दयनीय हैं.

खुल गई दावों की पोल

 करारिया गांव, विदिशा जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है, सरकारी सिस्टम की नाकामी कहें या सरकार की अनदेखी कि गांव वालों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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नदीं पार करके जाते हैं कब्रिस्तान

इस गांव में कब्रिस्तान और श्मशान पहुंचने के लिए एक ही रास्ता है बारिश के दिनों में यहां की नदी का पानी चढ़ जाता है तो इस तरह की परिस्थिति सामने आ जाती है. इस दौरान किसी की मौत हो जाए तो उसकी अर्थी या जनाजा उफनती नदी में से निकालना पड़ता है.

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कभी -कभी पानी में भी गिर जाते हैं जनाजे

कभी-कभी तो हालत ऐसे बन जाते है कि जनाजा या अर्थी नदीं में ही गिरा जाता है, आखिर में कड़े संघर्षों के बाद नदीं पार करके मुर्दे को अंतिम विदाई दी जाती है. ग्राम पंचायत सचिव कहते हैं ग्राम के कब्रिस्तान और श्मशान नदी के उस पार है इसलिए अंतिम यात्रा नदी से होकर जाती है. सरकार को कई बार इस प्रस्ताव के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन फंड की कमी के चलते आज तक उन्हें फंड नहीं मिल सका जिसके चलते वह निर्माण कार्य नहीं हो सका है.
 

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