सागर जिले की बंडा तहसील अंतर्गत आने वाले सलैया गांव में इन दिनों हर आंख नम है. एक सरकारी आदेश ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया है. प्रशासन की ओर से गांव खाली करने के लिए सिर्फ दो दिन की मोहलत दी गई है. ग्रामीणों का कहना है कि दो दिन बाद उनका सालों पुराना गांव, उनका आशियाना और उनकी यादें सब कुछ डूब क्षेत्र में समा जाएगा.
गांव में पुलिस और प्रशासनिक अमला लगातार पहुंच रहा है और लोगों से जल्द से जल्द घर खाली करने को कहा जा रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक, अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि “दो दिन बाद यहां किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलेगा.” इस चेतावनी के बाद गांव में दहशत और मायूसी का माहौल है.
रोजगार का भी संकट खड़ा हो गया
सलैया गांव के छोटे-छोटे मासूम बच्चे अपने टूटे-फूटे घरों से सरकारी कर्मचारियों को देखते हैं, जो आते ही घर खाली करने की बात कह जाते हैं. इन बच्चों को यह तक नहीं पता कि दो दिन बाद वे कहां रहेंगे, क्या खाएंगे और उनका भविष्य कैसा होगा. गांव के कई परिवार खेती-किसानी कर अपना जीवन यापन करते थे, लेकिन अब विस्थापन के बाद उनके सामने रोजगार का भी संकट खड़ा हो गया है.
भावुक हो उठे गांव के बुजुर्ग
एनडीटीवी की टीम से बातचीत करते हुए गांव के बुजुर्ग भावुक हो उठे. जब संवाददाता ने उनसे पूछा कि इस गांव से उनकी कितनी यादें जुड़ी हैं, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. शायद उन्हें अपने बचपन और जवानी के वे दिन याद आ गए, जो उन्होंने इसी मिट्टी में बिताए थे.
ग्रामीण माता राम ने बताया कि वह करीब 50 साल पहले ब्याह कर इस गांव में आई थीं. उन्होंने एक-एक रुपया जोड़कर अपना घर और गृहस्थी बसाई थी, लेकिन अब एक सरकारी आदेश ने सब कुछ बदल दिया. उन्होंने कहा कि अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वे कहां जाएं और अपने बच्चों को कहां लेकर रहें.
प्रशासनिक ने जल्द गांव खाली करने का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद गांव में मायूसी का माहौल है.
ग्रामीणों का आरोप
विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर बसाने के लिए जगह दी है, लेकिन वहां केमिकल फैक्ट्री होने के कारण वे वहां रहना नहीं चाहते. ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाले रसायन जानलेवा हैं और वहां रहने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार जो मुआवजा राशि मिलनी चाहिए थी, वह भी पूरी नहीं दी गई. लोगों का कहना है कि उन्हें जमीन के बदले जमीन और गांव के आसपास की सरकारी भूमि पर बसाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही.
प्रशासन ने दिया अल्टीमेटम
इन सबके बीच प्रशासन ने गांव खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है. प्रशासन का कहना है कि बारिश शुरू होते ही उल्दन बांध परियोजना का पानी गांव में भर जाएगा और पूरा क्षेत्र डूब में आ जाएगा. ऐसे में किसी भी तरह की जनहानि रोकने के लिए गांव को तत्काल खाली कराना जरूरी है. अब सलैया गांव के सैकड़ों परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दो दिन बाद उनका ठिकाना कहां होगा.
इस मामले में एसडीएम आरती यादव से फोन पर चर्चा की गई. उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार विस्थापन की पूरी प्रक्रिया की गई है. उन्होंने कहा कि उल्दन बांध परियोजना से सैकड़ों एकड़ भूमि सिंचित होगी और इसका लाभ क्षेत्र के हजारों किसानों को मिलेगा.
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