मंगलनाथ मंदिर में 20 किलो चांदी की जलाधारी स्थापित, हैदराबाद के भक्त ने खर्च किए ₹55 लाख 

उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में भगवान मंगलनाथ को करीब 20 किलो चांदी से बनी ₹55 लाख की नई जलाधारी अर्पित की गई. हैदराबाद के एक भक्त के संकल्प से बनी इस जलाधारी की स्थापना के लिए 7 घंटे गर्भगृह में प्रवेश बंद रखकर विशेष वैदिक अनुष्ठान किया गया.

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Ujjain mangalnath temple 20 kg silver jaladhari donation hyderabad devotee.

उज्जैन शहर के प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में शुक्रवार को भगवान मंगलनाथ को करीब 20 किलो चांदी से निर्मित नई जलाधारी अर्पित की गई. हैदराबाद के यजमान अमन सोनम लोहरी की श्रद्धा और संकल्प से तैयार कराई गई इस जलाधारी की अनुमानित लागत करीब 50 से 55 लाख रुपए बताई गई है. नई जलाधारी की स्थापना के लिए मंदिर में पूरे वैदिक विधान के साथ पूजन-अनुष्ठान किया गया. इस दौरान करीब सात घंटे तक गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा.

हैदराबाद के रहने वाले अमन सोनम लोहरी करीब एक से डेढ़ वर्ष पहले मंगलनाथ मंदिर में पूजन कराने आए थे. इस दौरान उन्होंने मंदिर की पुरानी जलाधारी को देखा. पुरानी जलाधारी के जीर्ण-शीर्ण होने और उसमें कुछ स्थानों पर छेद होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने भगवान मंगलनाथ को नई जलाधारी अर्पित करने की इच्छा जताई. उनकी इसी भावना के बाद जलाधारी के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई.

पहले नाप लिया, फिर तैयार हुई रजत जलाधारी

मंदिर के मुख्य पुजारी महंत अक्षय भारती के अनुसार, यजमान की भावना सामने आने के बाद मंदिर में सुनार को बुलाकर जलाधारी की पूरी नाप ली गई. इसके बाद करीब 20 किलो चांदी से नई जलाधारी तैयार कराई गई. निर्माण और अन्य प्रक्रिया में करीब 50 से 55 लाख रुपए का खर्च आया है. यजमान की इच्छा थी कि भगवान मंगलनाथ को जलाधारी विधि-विधान के साथ अर्पित की जाए. इसी के तहत शुक्रवार को निर्धारित मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार और अनुष्ठान शुरू किया गया.

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गर्भगृह में सात घंटे चला स्थापना का विधान

नई जलाधारी की स्थापना के लिए सुबह से ही मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए थे. विद्वान आचार्यों के माध्यम से विभिन्न पूजन कराए गए. जलाधारी की स्थापना से पहले भगवान की पूजा, हवन और अन्य वैदिक प्रक्रियाएं संपन्न की गईं. मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया.

इस दौरान गर्भगृह के दोनों कपाट बंद रहे और अंदर पुरानी जलाधारी को हटाकर नई रजत जलाधारी स्थापित करने की प्रक्रिया चली. मंदिर प्रशासक केके पाठक ने बताया कि जलाधारी की स्थापना सामान्य प्रक्रिया नहीं है. गर्भगृह में किसी भी प्रकार के कार्य के दौरान निर्धारित धार्मिक विधि-विधान का पालन किया जाता है. इसी के तहत नई जलाधारी की स्थापना के लिए भी पूरा अनुष्ठान कराया गया.

यजमान नहीं पहुंच पाए, पुजारी परिवार ने निभाई जिम्मेदारी

नई जलाधारी अर्पित करने वाले मुख्य यजमान अमन सोनम लोहरी किसी कारणवश शुक्रवार को मंदिर नहीं पहुंच सके. इसके बाद पुजारी परिवार के सदस्यों ने उनकी ओर से पूजन-अनुष्ठान की जिम्मेदारी निभाई. आचार्यों की मौजूदगी में पूरी धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराई गई. मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक केके पाठक ने बताया कि यजमान ने अपनी श्रद्धा के अनुरूप जलाधारी अर्पित करने की इच्छा जताई थी. उनकी भावना का सम्मान करते हुए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति के बाद स्थापना का कार्य कराया गया.

12:05 से 12:56 के मुहूर्त में शुरू हुआ मुख्य पूजन

मुख्य पुजारी महंत अक्षय भारती के मुताबिक, नई जलाधारी की स्थापना के लिए 12:05 से 12:56 बजे के बीच का विशेष मुहूर्त निर्धारित था. इसी मुहूर्त में मुख्य पूजन प्रक्रिया शुरू की गई. इसके बाद संध्याकालीन आरती तक जलाधारी को पुनर्स्थापित करने का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया. मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्थापना के दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन में अनावश्यक परेशानी न हो, इसलिए सुबह 11 बजे तक भात पूजा और सामान्य दर्शन की व्यवस्था जारी रखी गई. इसके बाद गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया गया.

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पुरानी जलाधारी हटाकर नई रजत जलाधारी लगी

मंगलनाथ मंदिर में पहले अष्टधातु की जलाधारी थी, जबकि बाद में पीतल की जलाधारी भी स्थापित रही. अब करीब 20 किलो चांदी से बनी नई जलाधारी भगवान मंगलनाथ को अर्पित की गई है. मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पुरानी जलाधारी को हटाने के बाद निर्धारित वैदिक प्रक्रिया के तहत नई जलाधारी को स्थापित किया गया. इसके लिए पूजन, हवन और अन्य अनुष्ठान किए गए. शाम की आरती तक पूरी प्रक्रिया संपन्न होने की उम्मीद जताई गई थी.

आरती के बाद प्रसादी का आयोजन

नई जलाधारी की स्थापना पूरी होने के बाद शाम करीब 5:30 से 6 बजे के बीच नियमित संध्याकालीन आरती किए जाने की व्यवस्था रखी गई. इसके बाद यजमान परिवार की ओर से प्रसादी का आयोजन भी किया गया. मंदिर प्रशासन और पुजारी परिवार ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा और धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराई गई. हैदराबाद के यजमान की भगवान मंगलनाथ के प्रति आस्था के चलते मंदिर को नई रजत जलाधारी मिली है, जो अब भगवान के अभिषेक की व्यवस्था का हिस्सा होगी. 

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(उज्जैन से शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट)