Shivnavratri 2026: उज्जैन के महाकाल में शिवनवरात्रि पर्व शुरू, 10 दिन तक होगा विशेष पूजन-श्रृंगार

Mahakal Mandir Maha shivratri 2026: उज्जैन के महाकाल में शिवनवरात्रि पर्व शुरू हो गया है.10 दिन तक विशेष पूजन-श्रृंगार होगा. आइए जानते हैं... 

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Shivnavratri Parva 2026 Mahakal Mandir : मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार से शिवनवरात्रि पर्व शूरू हो गया है. इसके चलते प्रातः कोटेश्वर महादेव के पूजन के साथ किया गया. इसके बाद 11 ब्राह्मणों द्वारा गृर्भगृह बाबा महाकाल  का पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक किया गया.

शिव नवरात्रि की परंपरानुसार शुक्रवार सुबह मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा ने 11 पुजारियों के साथ कोटितीर्थ पर स्थित कोटेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन किया. फिर मंदिर के गर्भगृह में 11 पुजारियों के साथ लघु रुद्राभिषेक कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला और छत्र से आकर्षक श्रृंगार किया गया. अब दोपहर 1 बजे भोग आरती अपराह्न 3 बजे पंचामृत पूजन के बाद भांग से विशेष श्रृंगार और शाम को भगवान महाकाल को चंदन उबटन लगाकर जलधारी पर हल्दी अर्पण करने के बाद लाल, गुलाबी और पीले रंग के नवीन वस्त्र अर्पित किए जाएंगे.

सिर्फ उज्जैन में शिवरात्रि क्यों?

दरअसल देश में 12 ज्योतिर्लिंग है. देश भर में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता हैं, लेकिन नवरात्रि की तरह उज्जैन में शिव नवरात्रि मनाने की वजह यह है कि यहां महाकाल के साथ शक्ति स्वरूप हरसिध्दि माता का विराजित होना है. इसीलिए यहां नवरात्रि की तरह शिव नवरात्रि पर्व के अंतिम दिन महाशिवरात्रि मनाते हैं.

ऐसे तो शिव नवरात्रि 9 दिनों की ही होती है, लेकिन दो तिथियों के कारण इस बार महाकाल में शिवनवरात्रि महा उत्सव 6 फरवरी से 15 फरवरी तक 10 दिन मनाया जाएगा. जिसके चलते पबाबा महाकाल प्रतिदिन विशेष शृंगारित होकर नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे.

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शिवनवरात्रि पर 9 दिन का विशेष श्रृंगार

6 फरवरी: चंदन, भांग श्रृंगार
7 फरवरी: नवीन वस्त्र
8 फरवरी: शेषनाग श्रृंगार
9 फरवरी: घटाटोप श्रृंगार
10 फरवरी: छबीना श्रृंगार
11 फरवरी: होलकर श्रृंगार
12 फरवरी: मनमहेश श्रृंगार
13 फरवरी: उमा-महेश श्रृंगार
14 फरवरी: शिव तांडव श्रृंगार
15 फरवरी: सप्तधान का मुखौटा

महाशिवरात्रि पर ऐसे होंगे दर्शन 

महाशिवरात्रि महापर्व 15 फरवरी को करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां की हैं. इसके चलते सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर दर्शन होंगे. 250 रुपये की शीघ्र दर्शन रसीद/पासधारियों को लगभग एक किलोमीटर पैदल मार्ग चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे. 

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