Twisha Sharma Funeral Procession: अपनी युवा बेटी को असमय गंवाने वाले ट्विशा के परिवार ने उनके अंतिम संस्कार से पहले अपने परिचितों और भोपाल वासियों के नाम एक संदेश जारी किया है. अपने इस संदेश में ट्विशा के परिजनों ने बहुत ही मार्मिक और दिल को छू जाने वाली अपील की है. इस अपील में ट्विशा के पिता ने लिखा है कि इससे बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता, जिस बेटी को गोद में खिलाया, कंधों पर बिठाया और दुल्हन बनाकर विदा किया, आज उसकी अर्थी को कंधा देना पड़ेगा. इसके आगे उन्होंने लिखा है कि आज हम ट्विसा को नहीं, अपने जीवन के अमूल्य हिस्से को विदा करेंगे.
दरअसल, किसी भी माता-पिता के लिए दुनिया का सबसे वजनी बोझ उसकी युवा संतान का जनाजा या अर्थी होती है. द्विशा शर्मा के परिवार पर भी आज ऐसे दुखों का पहाड़ टूटा है. इस असहनीय दुख के साथ-साथ परिवार को एक ऐसी पीड़ा से भी गुजरना पड़ा, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. दरअसल, भारतीय सनातन परंपराओं में जहां मृत्यु के तत्काल बाद अंतिम संस्कार की रीतियां पूरी की जाती हैं. वहीं, कुछ बेहद दर्दनाक और जटिल परिस्थितियों की वजह से द्विशा का पार्थिव शरीर 12 दिनों तक अंतिम विदाई का इंतजार करता रहा. लिहाजा, उनके पिता का कहना है कि अपनी लाडली को विदा करने के लिए तेरहवें दिन तक का यह इंतजार किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है.
परिवार ने कानून पर जताया भरोसा
इस मौके पर शोकाकुल शर्मा परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे देश के कानून और विधि व्यवस्था का पूरा सम्मान करते हैं. जांच की हर प्रक्रिया में उन्होंने सहयोग किया है और आगे भी करेंगे. लेकिन इसके बदले में उनकी सिर्फ एक ही मांग है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष हो. साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो, ताकि सच बिना किसी दबाव या प्रभाव के सबके सामने आ सके. लिहाजा, परिवार का कहना है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. परिवार को पूरा विश्वास है कि न्याय की राह में रोड़े भले आएं, पर कानून अपना काम करेगा और सच की जीत होगी.
समाज से एकजुट होने और नैतिक समर्थन की अपील
आज शाम जब द्विशा पंचतत्व में विलीन होंगी, तो वे हाथ जिन्होंने उसे उंगली पकड़कर चलना सिखाया, पाल पोसकर बड़ा किया और जिसके सुनहरे भविष्य के सपने बुने, वही हाथ उसे मुखाग्नि देंगे. इस हृदयविदारक घड़ी में शर्मा परिवार ने भोपाल के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, महिला संगठनों, पत्रकारों और न्यायप्रिय लोगों से एकजुट होने की अपील की है. दरअसल, परिवार चाहता है कि इस कठिन समय में समाज उनके साथ खड़ा हो और ट्विशा को न्याय दिलाने की इस मुहिम को अपना नैतिक समर्थन दें.
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ट्विशा का अंतिम संस्कार रविवार शाम 5 बजे भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर किया जाएगा. हालांकि, उनकी अस्थियां ऋषिकेश में विसर्जित की जाएगी. ट्विशा के परिवार ने इस दुख के पल में सभी शुभचिंतकों और नागरिकों से अंतिम विदाई में शामिल होने और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की है.