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ट्वीशा केस: गिरीबाला की जमानत पर घमासान, कोर्ट में 2.5 घंटे चली बहस; CBI ने कहा- दहेज सिर्फ गरीब नहीं मांगते

ट्वीशा डेथ केस में आरोपी गिरीबाला सिंह की जमानत याचिका पर कोर्ट में ढाई घंटे तक सुनवाई चली. सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि दहेज मांगने का संबंध आर्थिक स्थिति से नहीं होता. वहीं बचाव पक्ष ने मानवीय आधार, स्वास्थ्य और जांच में सहयोग का हवाला देकर राहत की मांग की.

ट्वीशा केस: गिरीबाला की जमानत पर घमासान, कोर्ट में 2.5 घंटे चली बहस; CBI ने कहा- दहेज सिर्फ गरीब नहीं मांगते

ट्वीशा मौत मामले में आरोपी गिरीबाला सिंह की जमानत याचिका पर अदालत में शुक्रवार को लंबी और तीखी बहस हुई. करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई ने अपने-अपने तर्क पेश किए. एक तरफ गिरीबाला के वकील ने उनकी उम्र, पारिवारिक स्थिति, मां के स्वास्थ्य और जांच में सहयोग को आधार बनाकर जमानत की मांग की, तो वहीं सीबीआई और ट्वीशा पक्ष के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता.  

जमानत का सीबीआई ने किया विरोध

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से जमानत का विरोध किया गया. एजेंसी के वकील ने अदालत में कहा कि केवल यह तथ्य कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जमानत का आधार नहीं बन सकता. उन्होंने यह भी दलील दी कि गिरीबाला की मां के स्वास्थ्य को जमानत का आधार बनाया जा रहा है, जबकि उनका इलाज डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है.

वॉयस सैंपल को लेकर भी उठे सवाल

ट्वीशा पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि सीबीआई की टीम वॉयस सैंपल लेने गई थी. उन्होंने दावा किया कि समर्थ ने वॉयस सैंपल देने से इनकार कर दिया था. वहीं गिरीबाला का वॉयस सैंपल लिया, लेकिन रिकॉर्डिंग प्रक्रिया पूरी तरह सफल नहीं हो सकी. इस पर सीबीआई ने आपत्ति भी दर्ज कराई थी.

गिरीबाला ने कहा- जांच में किया पूरा सहयोग

अदालत में गिरीबाला की ओर से कहा गया कि उन्होंने जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग किया है. उनके अनुसार, उनसे करीब तीन घंटे तक ट्रांसक्रिप्ट पढ़वाई गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मामले में संबंधित व्यक्तियों को पत्र लिखे थे और जांच के दौरान किसी तरह का असहयोग नहीं किया. बचाव पक्ष ने सीबीआई की ओर से लगाए गए असहयोग के आरोपों को खारिज किया.

दहेज हत्या की परिभाषा पर सीबीआई की दलील

सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने दहेज हत्या से जुड़े पहलुओं पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति को दहेज मांगने या न मांगने का पैमाना नहीं माना जा सकता. अदालत में उन्होंने तर्क दिया कि यह कहना उचित नहीं है कि दहेज की मांग केवल आर्थिक रूप से कमजोर लोग ही करते हैं.

बचाव पक्ष ने मांगी मानवीय आधार पर राहत

गिरीबाला के वकील ने अदालत से कहा कि उनकी मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें मानवीय आधार पर जमानत दी जानी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जमानत मिलने के बाद गिरीबाला फरार हो जाएंगी या फिर सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर पाएंगी. बचाव पक्ष का कहना था कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और ऐसे में जमानत देने पर विचार किया जाना चाहिए.

ट्वीशा के बयान को लेकर उठाया विरोधाभास का मुद्दा

ट्वीशा पक्ष के वकील ने अदालत में घटनाक्रम से जुड़े बयानों पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि उपलब्ध बयानों में कई विरोधाभास नजर आते हैं. उन्होंने दलील दी कि एक ओर कहा गया कि सभी ने साथ बैठकर भोजन किया और सामान्य रूप से समय बिताया, वहीं दूसरी ओर बाद की परिस्थितियां अलग तस्वीर पेश करती हैं. इसी आधार पर उन्होंने मामले की गंभीरता को रेखांकित किया.

व्हाट्सऐप चैट और दस्तावेजों का भी हुआ जिक्र

सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप चैट और अन्य दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया. बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि कुछ महत्वपूर्ण बातचीत और पत्र अदालत के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं. वहीं स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि गिरीबाला की सेहत में गिरावट आई है और उनका वजन कम हुआ है.

अदालत में जारी रही लंबी बहस

गिरीबाला सिंह की जमानत याचिका पर राम प्रताप मिश्रा की अदालत में सुनवाई हुई. करीब ढाई घंटे तक दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे. बचाव पक्ष लगातार जमानत के पक्ष में दलील देता रहा, जबकि सीबीआई और शिकायतकर्ता पक्ष ने इसका विरोध किया. अब इस मामले में अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

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