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Success Story: 10% से 100% तक पहुंचा रिजल्ट, 5 शिक्षकों की मेहनत ने बदला 'मजदूर बस्ती' के स्कूल का नसीब

Teachers Success Story: तीन साल पहले जिले के उत्कृष्ट शिक्षकों ने स्थानांतरण नीति के तहत स्वेच्छा से इस स्कूल को चुना. प्राचार्य कमरूद्दीन शेख फलक, मीरा मगरे, श्रवण जाधव, मनोहर जायसवाल और रवि कुमार की टीम ने मिलकर एक रोडमैप तैयार किया. इस मेहनत का असर यह हुआ कि जो रिजल्ट पहले 10% था, वह दूसरे साल 60% और अब तीसरे साल 100% तक पहुंच गया. खास बात यह है कि 80 प्रतिशत छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं.

Success Story: 10% से 100% तक पहुंचा रिजल्ट, 5 शिक्षकों की मेहनत ने बदला 'मजदूर बस्ती' के स्कूल का नसीब

Burhanpur teachers Success Story: "सच्चा शिक्षक वही है, जो चुनौतियों से लड़कर, सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम दे और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे." इस वाक्य को बुरहानपुर के आदिलपुरा स्थित शासकीय नवीन हाई स्कूल के पांच शिक्षकों ने न केवल अपनाया, बल्कि सच कर दिखाया है. जिस स्कूल का रिजल्ट कभी महज 10 प्रतिशत हुआ करता था, आज वहां के शिक्षकों की 'मिशन मोड' कार्ययोजना की बदौलत 10वीं बोर्ड का परिणाम शत प्रतिशत (100%) हो गया है.

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत एमागिर्द की मजदूर बस्ती आदिलपुरा में यह स्कूल संचालित है. साल 2019 में इस माध्यमिक शाला को हाई स्कूल का दर्जा तो मिल गया, लेकिन हाई स्कूल स्तर का भवन आज तक नसीब नहीं हुआ है. हालत यह है कि कक्षा 6वीं से 10वीं तक की पढ़ाई आज भी सिर्फ 3 कमरों में बच्चों को चटाई पर बैठाकर शिक्षा दी जा रही है.

10% से 100% तक पहुंचा रिजल्ट, 5 शिक्षकों की मेहनत ने बदला मजदूर बस्ती के स्कूल का नसीब

10% से 100% तक पहुंचा रिजल्ट, 5 शिक्षकों की मेहनत ने बदला 'मजदूर बस्ती' के स्कूल का नसीब
Photo Credit: Shariq Akhtar durrani

 बदली कार्यशैली, तो परिणाम भी बदल गया

तीन साल पहले जिले के उत्कृष्ट शिक्षकों ने स्थानांतरण नीति के तहत स्वेच्छा से इस स्कूल को चुना. प्राचार्य कमरूद्दीन शेख फलक, मीरा मगरे, श्रवण जाधव, मनोहर जायसवाल और रवि कुमार की टीम ने मिलकर एक रोडमैप तैयार किया.

  •  डोर टू डोर कैंपेन: शिक्षकों ने मजदूर बस्ती के घर घर जाकर पालकों को शिक्षा का महत्व समझाया और बच्चों के प्रवेश सुनिश्चित किए.
  •  नियमित मॉनिटरिंग: छात्रों और पालकों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर स्कूल से बंक मारने वाले बच्चों पर नजर रखी गई.
  •  एक्स्ट्रा क्लासेस और तैयारी: बोर्ड परीक्षा के लिए विशेष रणनीति बनाई गई, जिसमें पुराने पेपर सॉल्व करवाना और अतिरिक्त कक्षाएं लेना शामिल था.

इस मेहनत का असर यह हुआ कि जो रिजल्ट पहले 10% था, वह दूसरे साल 60% और अब तीसरे साल 100% तक पहुंच गया. खास बात यह है कि 80 प्रतिशत छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं.

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छात्रों के सपनों को मिले पंख

मजदूर और बुनकर परिवारों से आने वाले इन बच्चों का आत्मविश्वास अब सातवें आसमान पर है. 71 प्रतिशत अंक लाने वाली छात्रा रानी और नाजमीन बानो अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों को देती हैं और आगे चलकर शिक्षक बनने का सपना देख रही हैं. वहीं बुनकर परिवार के शेख रेहान अब डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं.

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शिक्षा विभाग बनाएगा 'नजीर'

स्कूल की इस अभूतपूर्व सफलता की चर्चा अब पूरे जिले में है. जिला शिक्षा अधिकारी रोहिणी पवार ने इन शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इनकी कार्य योजना की समीक्षा की जाएगी. विभाग की योजना है कि इस मॉडल को जिले के उन अन्य स्कूलों में भी लागू किया जाए जिनका रिजल्ट कमजोर रहता है, ताकि वहां भी सुधार लाया जा सके.

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स्कूल की इस सफलता पर सेवा सदन कॉलेज के प्राचार्य शेख शकील कहते हैं कि जब बच्चों का फाउंडेशन (बुनियादी शिक्षा) मजबूत होता है, तभी वे उच्च शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं. इन शिक्षकों ने विपरीत परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह काबिले तारीफ है.

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