Dog Bites: स्कूल जाते बच्चों पर झपट रहे आवारा कुत्ते, जनवरी में 311 लोगों को खूंखारों ने बनाया शिकार

Dog bite cases in MP: शहर की गर्ग कॉलोनी स्थित एक सरकारी स्कूल के आसपास भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. स्कूल खुलने और छुट्टी के समय कुत्ते अक्सर बच्चों के पीछे दौड़ते देखे जा रहे हैं. अभिभावकों में डर इस कदर बढ़ गया है कि कई लोग बच्चों को अकेले भेजने से हिचकिचा रहे हैं.

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Stray Dog Bites cases in Betul: बैतूल जिले में आवारा कुत्तों (Stray Dog) की समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है. शहर के कई इलाकों में कुत्तों के झुंड लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं, खासकर बच्चों के लिए. डॉग बाइट की घटनाओं में तेज़ बढ़ोतरी ने लोगों के मन में डर का माहौल पैदा कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अकेले जनवरी महीने में ही 311 लोग कुत्तों के काटने के बाद जिला अस्पताल पहुंचे. इससे स्पष्ट है कि बैतूल शहर में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है.

शहर की गर्ग कॉलोनी स्थित एक सरकारी स्कूल के आसपास भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. स्कूल खुलने और छुट्टी के समय कुत्ते अक्सर बच्चों के पीछे दौड़ते देखे जा रहे हैं. अभिभावकों में डर इस कदर बढ़ गया है कि कई लोग बच्चों को अकेले भेजने से हिचकिचा रहे हैं. हाल ही में एक बच्चे पर पीछे से हमला कर कुत्ते ने गंभीर चोट पहुंचाई. घटना के बाद इलाके में गुस्सा और चिंता दोनों देखने को मिल रही है.

प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई दहशत की कहानी

स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों का कहना है कि कुछ कुत्ते बेहद आक्रामक हो चुके हैं. एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक कई बार राह चलते लोगों पर अचानक हमला हो जाता है. साइकिल सवार बच्चों और महिलाओं को गिरा देने की घटनाएं भी सामने आई हैं.

शिकायतें हुईं, कार्रवाई अब भी अधूरी

क्षेत्र के लोगों ने नगर पालिका और पुलिस में लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई. नागरिकों का आरोप है कि निगम प्रशासन सिर्फ आश्वासन दे रहा है, ज़मीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.

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भूख से बढ़ रहा आक्रामक व्यवहार

कुत्तों के आक्रामक हमले पर जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि आवारा कुत्तों को पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण उनका स्वभाव चिड़चिड़ा और आक्रामक हो जाता है. हाल के दिनों में डॉग बाइट मामलों में वृद्धि इसी का परिणाम हो सकती है. हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने बताया कि एंटी-रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन रोकथाम के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई जरूरी है.

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स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों के आतंक पर लगाम लगाने के लिए कुत्तों की पकड़-धकड़ अभियान तेज की जाए.  इसके तहत नसबंदी और टीकाकरण के अलावा लावारिस पशु छोड़ने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई की व्यवस्था की जाए. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो कोई बड़ी और दुखद घटना कभी भी हो सकती है. 

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