Lifegiving Betwa River: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बहने वाली बेतवा नदी में बढ़ता कटान विदिशा शहर के पहचान के लिए खतरा बन रही है. रास्तों पर बढ़े अतिक्रमण ने सदियों से शहर का प्यास बुझाने वाली जीवनदायिनी नदी अब धीरे-धीरे शहर की ओर बढ़ रही है और नदी का रौद्र रूप एक दिन पूरे विदिशा शहर को अपने आगोश में ले सकती है.
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धीरे-धीरे से दिशा बदल रही बेतवा नदी
रिपोर्ट के मुताबिक विदिशा शहर की जीवनदायिनी बेतवा नदी में कटान तेजी से बढ़ा है, जिससे नदी की दिशा तेजी से बदल रही है. नदी का यह रूप शहर को डराने वाली है. आशंका है कि जिस नदी ने हर बाशिंदे की प्यास बुझाई कल यही नदी हर बाशिंदे को अपने आगोश में लेने को आतुर दिखाई दे रही है.
नदीं ने बदला अपना स्वाभाविक रास्ता
गौरतलब है बेतवा नदी ने इन दिनों अपना स्वाभाविक रास्ता बदलना शुरू कर दिया है, जीवनदायिनी बेतवा नदी जहां से वर्षों से बहती रही थी,अब वहां से कटाव बढ़ता जा रहा है और नदी धीरे-धीरे विदिशा शहर की ओर बढ़ रही है. बताया जा रहा है कि हर साल बेतवा नदी के घाटों पर तीन से पांच फीट तक का कटाव हो रहा है.
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एक-एक कर नदी में समाए पुराने घाट
रिपोर्ट कहती है कि बेतवा में बढ़ते कटाव का असर है कि कभी आस्था के प्रतीक पुराने घाट एक-एक कर बेतवा नदी में समाते जा रहे हैंं. बेतवा उत्थान समिति के अतुल शाह के मुताबिक बेतवा नदी के घाटों का कटाव बहुत तेजी से बढ़ा है अगर कटाव रोकने के लिए ठोस और सार्थक प्रयास नहीं किए गए, तो वो दिन दूर नहीं जब पूरा विदिशा शहर जलमग्न हो जाएगा.
नदी में समा सकता है राम घाट मंदिर
गौरतलब है बेतवा नदी के कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि राम घाट मंदिर कभी भी नदी में समाहित हो सकता है. बेतवा नदी के घाट के एक पुजारी की मानें तो घाटों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है, लेकिन प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है, अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो मंदिर को बचाना मुश्किल हो जाएगा.
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विदिशा शहर की ओर है बेतवा का रुख
उल्लेखनीय है कभी विशाल रूप में बहने वाली बेतवा मौके पर नालों में बदल गई है, वजह बेतवा की जमीन पर अतिक्रमण,
नालों और सीवेज का नदी में गिरना है. मामले में प्रशासनिक उदासीनता के चलते बेतवा नदी अब अपना रास्ता तलाश रही है और उसका रुख सीधे विदिशा शहर की ओर है, जो विदिशा को बड़े विनाश की ओर ले जा सकती है.
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