Balaghat: कई परिवारों की रोजी-रोटी का साधन है पक्की ईंटें, पुरानी पद्धति का आज भी करते हैं पालन

Balaghat News in Hindi: एमपी का बालाघाट जिला अपने ईंटों के लिए बहुत फेमस है. यहां के कई परिवारों के जीवन बसर का आधार ईंट भट्टियां ही हैं. लोग आज भी पुरानी पद्धति से ईंट बनाने का काम करते हैं. आइए आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.

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बालाघाट के इस गांव के लोग बनाते हैं खास ईंट

MP News in Hindi: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का बालाघाट (Balaghat) जिला यूं तो कई मामलों में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां के ईंट की प्रसिद्धि का बहुत कम लोगों को पता है... दरअसल, जिला मुख्यालय से महज 15 किमी की दूरी पर एक गांव है, जिसका नाम लिंगा है. यहां के ज्यादातर ग्रामीण ईंट बनाने (Brick Making) का काम करते हैं. यहां की ईंटे न सिर्फ बालाघाट जिले में ही प्रसिद्ध है, बल्कि महाराष्ट्र में इनकी खास मांग है. इस ईंट को लोग दूर-दूर से अपने यहां मंगाते हैं.

लिंगा गांव की ईंटें हैं बहुत खास

लिंगा में होते हैं मिट्टी आधारित उद्योग

बालाघाट जिले का लिंगा गांव मिट्टी से जुड़े काम करने के लिए प्रसिद्ध है. यहां पर मिट्टी के बर्तन से लेकर मटके तक बनाए जाते हैं. वहीं, यहां पर ईंट बनाने का काम किया जाता है. करीब 25 से 30 परिवार ईंट बनाने के व्यवसाय से जूड़े हुए हैं. इसी से उनके परिवार का पालन-पोषण होता है. ईंट बनाने का काम दशहरे के बाद शुरू होता है और मई तक जारी रहता है. इसके बाद ये लोग दूसरे के खेतों में खरीफ में धान की खेती में जुट जाते हैं.

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ईंट के व्यापार में लगा हुआ है पूरा गांव

यहां की ईंटे इसलिए है बेहद खास

लिंगा में चिकनी दोमट मिट्टी पाई जाती है. ये ईंट बनाने के लिए बिल्कुल सही मिट्टी है. इस मिट्टी से तैयार होने वाली ईंटे बारिश के दिनों में ज्यादा भीग जाने पर भी खराब नहीं होती हैं. वहीं, ईंटे भी काफी मजबूत होती हैं. ऐसे में उनकी मांग दूर-दूर तक है.

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बालाघाट की ईंट पूरे देश में फेमस

ऐसे तैयार होती है खास ईंट

ईंट बनाने के लिए पहले मिट्टी को चुरा किया जाता है. इसके बाद इसमें उचित मात्रा में रेत यानी बालू मिलाई जाती है. इसी क्रम में धान का भूसा मिलाया जाता है, जिससे ईंट मजबूत होती है. इसके बाद उसमें पानी मिलाया जाता है. वहीं, इसके बाद इसे अच्छे से मिक्स कर एक मसाला तैयार किया जाता है. इसे फिर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है. फिर इस मिट्टी के मसाले को ईंट का सांचे यानी मोल्ड में डालकर पीटा जाता है. इसके बाद इसे एक लाइन से सुखाया जाता है. इसके सूखने के बाद ईंट का भट्ठा तैयार किया जाता है और महीने भर बाद ईंट बनकर तैयार हो जाती है.

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उद्योग में महिलाओं को बराबर की भागीदारी

इस खास उद्योग में महिलाओं की बराबर की भागीदारी होती है. ईंट बनाने और भट्ठा रचने का काम पूरुष करते हैं, तो वहीं, ईंट के मसाले का सामान महिलाएं तैयार करती है. पुरुष ईंट बनाते हैं, तो महिलाएं उन्हें सुखाने का काम करती हैं. पुरुष ईंट का भट्ठा रचने का काम करते हैं, तो महिलाएं ईंट लाकर देती है.

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