सिंगरौली: मध्य प्रदेश यूं ही "अजब-गजब" नहीं है, यहां आए दिन ऐसे मामले भी सामने आते हैं. अब ऐसा ही एक गजब का करनामा सिंगरौली जिले के देवसर जनपद क्षेत्र के मझिगवां गांव से सामने आया है. जहां खेतों के बीचों-बीच एक पुल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो वहां कोई सड़क है, न नदी, न नाला और न ही ऐसा कोई रास्ता, जहां पुल की जरूरत महसूस हो. अब यह 'खेतों में उगा पुल' विकास कार्यों की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.
खेतों में खत्म होते हैं पुल के दोनों छोर
देवसर जनपद पंचायत के सीईओ सूरज शुक्ला ने दिए मामले की जांच के आदेश.
बुनियादी सुविधाएं अधूरी, कागजों पर विकास जारी
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनके समाधान का इंतजार वर्षों से किया जा रहा है. कहीं सड़कें बदहाल हैं, कहीं नालियों की व्यवस्था अधूरी है तो कहीं बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. लेकिन इन समस्याओं को सुलझाने की बजाय खेतों के बीच पुल बनाने को प्राथमिकता दिए जाने से लोगों में भारी नाराजगी है. उनका कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों का लाभ सीधे जनता को मिलना चाहिए, न कि वे केवल फाइलों और कागजों तक सीमित रह जाएं.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई 'फाइलों की इंजीनियरिंग'
मामले की जांच के दिए गए आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है. जानकारी के अनुसार पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की गई है और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है. अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पुल निर्माण के पीछे क्या औचित्य था, स्वीकृति किस आधार पर दी गई और क्या निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है.
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दोषियों पर कड़़ी कार्रवाई की जाएगी
"मामला मेरे संज्ञान में आया है. पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दे दिए गए हैं, जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी."
सूरज शुक्ला, सीईओ (जनपद पंचायत, देवसर)