देश का सबसे अनोखा पुल, न नदी, न नाला, न सड़क... खेतों के बीच कर द‍िया निर्माण 

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से अजब-गजब तस्वीर आई है. यहाँ देवसर के मझिगवां गांव में बिना सड़क, नदी या नाले के खेतों के बीचों-बीच पुल बना दिया गया, जिस पर जांच बैठ गई है.

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सिंगरौली जिले के मझिगवां गांव में खेतों के बीच बना दिया लाखों का पुल.

सिंगरौली: मध्य प्रदेश यूं ही "अजब-गजब" नहीं है, यहां आए द‍िन ऐसे मामले भी सामने आते हैं. अब ऐसा ही एक गजब का करनामा सिंगरौली जिले के देवसर जनपद क्षेत्र के मझिगवां गांव से सामने आया है. जहां खेतों के बीचों-बीच एक पुल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो वहां कोई सड़क है, न नदी, न नाला और न ही ऐसा कोई रास्ता, जहां पुल की जरूरत महसूस हो. अब यह 'खेतों में उगा पुल' विकास कार्यों की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है. 

खेतों में खत्म होते हैं पुल के दोनों छोर

गांव के लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है, वहां चारों तरफ केवल कृषि भूमि है. पुल तक पहुंचने के लिए कोई संपर्क मार्ग नहीं है. पुल के दोनों छोर सीधे खेतों में जाकर खत्म हो रहे हैं. ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब वहां न सड़क थी और न किसी जलधारा को पार करने की आवश्यकता थी. इसे सवाल खड़े हो रहे हैं क‍ि इस निर्माण की मंजूरी किस आधार पर दी गई? क्या अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था? क्या तकनीकी परीक्षण हुआ था? और यदि हुआ था, तो उसकी रिपोर्ट में क्या दर्ज है?

देवसर जनपद पंचायत के सीईओ सूरज शुक्ला ने दिए मामले की जांच के आदेश.

बुनियादी सुविधाएं अधूरी, कागजों पर विकास जारी

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनके समाधान का इंतजार वर्षों से किया जा रहा है. कहीं सड़कें बदहाल हैं, कहीं नालियों की व्यवस्था अधूरी है तो कहीं बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. लेकिन इन समस्याओं को सुलझाने की बजाय खेतों के बीच पुल बनाने को प्राथमिकता दिए जाने से लोगों में भारी नाराजगी है. उनका कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों का लाभ सीधे जनता को मिलना चाहिए, न कि वे केवल फाइलों और कागजों तक सीमित रह जाएं.

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई 'फाइलों की इंजीनियरिंग'

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब इस पुल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए. लोग इसे लेकर "खेतों में उगा पुल", "कागजी विकास" और "फाइलों की इंजीनियरिंग" जैसे नाम देकर तंज कस रहे हैं.  

मामले की जांच के दिए गए आदेश 

मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है. जानकारी के अनुसार पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की गई है और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है. अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पुल निर्माण के पीछे क्या औचित्य था, स्वीकृति किस आधार पर दी गई और क्या निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है.

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दोषियों पर कड़़ी कार्रवाई की जाएगी  

"मामला मेरे संज्ञान में आया है. पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दे दिए गए हैं, जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी."

सूरज शुक्ला, सीईओ (जनपद पंचायत, देवसर)