Satna Medical College Doctors Protest: सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर डॉक्टरों और छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. पानी की गंभीर किल्लत और लिफ्ट बंद होने की समस्या ने हालात इतने बिगाड़ दिए हैं कि तीन दिनों में दूसरी बार डॉक्टरों को प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा. गुरुवार को पहले मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर में नारेबाजी हुई, इसके बाद डॉक्टरों और छात्रों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा और प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा, जिससे पढ़ाई, इलाज और सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है.
तीन दिन में दूसरी बार आंदोलन
गुरुवार को मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और छात्रों का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा. पहले अस्पताल गेट पर प्रदर्शन किया गया और नारे लगाकर प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की गई. इसके बाद डॉक्टर और छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने ज्ञापन देकर व्यवस्था सुधारने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
पानी की पाइपलाइन फूटी, पूरा परिसर प्रभावित
मेडिकल कॉलेज के छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि इंटरनल पाइपलाइन फूटने के कारण पूरे परिसर में पानी की सप्लाई ठप हो गई है. बीते शुक्रवार रात से पानी नहीं आ रहा, जिससे संकट लगातार गहराता जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि लोगों को बाल्टियों में दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है, जबकि पीने के लिए बाहर से बोतलबंद पानी खरीदना मजबूरी बन गया है.
650 लोग झेल रहे पानी का संकट
कॉलेज परिसर में करीब 650 लोग इस जलसंकट से प्रभावित हैं. इनमें 450 से अधिक छात्र-छात्राएं और रेजिडेंट डॉक्टर हैं, जबकि करीब 200 परिवार भी इसी परिसर में रहते हैं. पानी की कमी का असर सिर्फ रोजमर्रा की जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़ाई, हॉस्टल व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है.
30 में से 28 लिफ्ट बंद होने का आरोप
पानी के साथ-साथ लिफ्ट व्यवस्था भी डॉक्टरों और छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है. प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि दस मंजिला मेडिकल कॉलेज भवन में कुल 30 लिफ्ट हैं, लेकिन इनमें से 28 लंबे समय से बंद पड़ी हैं. बिजली कटौती से स्थिति और खराब हो जाती है. लिफ्ट बंद होने के कारण मरीजों, बुजुर्गों और डॉक्टरों को सीढ़ियों से ऊपर-नीचे जाना मजबूरी हो गया है, जिससे कई बार हादसे भी हो चुके हैं.
पढ़ाई और इलाज दोनों पर असर
डॉक्टरों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी से न सिर्फ उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है. रेजिडेंट डॉक्टरों और छात्रों के लिए यह हालात मानसिक तनाव का कारण बन रहे हैं.
डीन का जवाब
मामले पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ एसपी गर्ग ने कहा कि पानी की पाइपलाइन बार-बार फूट रही है. इसे बदलने के लिए कलेक्टर द्वारा निर्देश दिए गए हैं और जल्द काम शुरू होगा. लिफ्ट के संबंध में उन्होंने कहा कि मेंटिनेंस के लिए फिलहाल राशि उपलब्ध नहीं है, जैसे ही बजट आएगा, लिफ्ट मरम्मत का कार्य कराया जाएगा.
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
डॉक्टरों और छात्रों ने साफ कहा है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे फिर से बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे. उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसी संस्था में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है.
यह भी पढ़ें : अब हिन्दी में पढ़िए सिविल इंजीनियरिंग, MP सरकार देगी 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
यह भी पढ़ें : भोपाल से रवाना हुई ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026', CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी
यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सर्जरी: 5 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों को, निहारिका बारीक गृह सचिव, 42 IAS का तबादला
यह भी पढ़ें : मुंबई-आगरा हाईवे पर चक्का जाम : MP कांग्रेस का ‘सड़क सत्याग्रह'; गेहूं खरीदी और MSP को लेकर किसान आंदोलन