फैक्ट्री से निकलने वाले धुंए और रसायनों ने गांव वालों का किया जीना मुहाल, पलायन करने को हो रहे हैं मजबूर

MP News: दरअसल सौरई गांव में स्थित मध्य भारत एग्रो फैक्ट्री के कारण आसपास के सभी जलस्रोत प्रदूषित हो चुके हैं. इनमें रसायनों की मात्रा बढ़ने से अब पानी पीने योग्य नहीं रहा है.

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Sagar News: गांव वाले पलायन करने को हो रहे हैं मजबूर

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश (Madhya Praesh) के सागर (Sagar) में फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और रसायनों से ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है. यहां के बंडा के सौरई गांव में ग्रामीण सांस लेने में तकलीफ, सिर में दर्द, संक्रमण व अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं. फसलों, पेड़-पौधों के पत्ते भी इससे सूख रहे हैं. इनमें फल लगने भी बंद हो रहे हैं.

पीने योग्य नहीं रहा है पानी

दरअसल सौरई गांव में स्थित मध्य भारत एग्रो फैक्ट्री के कारण आसपास के सभी जलस्रोत प्रदूषित हो चुके हैं. इनमें रसायनों की मात्रा बढ़ने से अब पानी पीने योग्य नहीं रहा है. ग्रामीणों ने परेशान होकर फैक्ट्री के एक किलोमीटर के दायरे में स्थित जलस्रोतों का पानी पीना बंद कर दिया है. फैक्ट्री से निकले धुएं व रसायनों के कारण क्षेत्र की 75% फसलें तबाह हो गई हैं.

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यहां के स्थानीय ग्रामीणों से जब एनडीटीवी के संवाददाता ने बातचीत की तो कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं. यहां की रहने वाली महरानी वाई अहिरवार ने बताया फैक्ट्री के धुएं के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत होती है. उन्होंने बताया पिछले एक साल में दवाई पर डेढ़ लाख रुपए खर्च कर चुके हैं.

प्रदूषण के कारण मर रहे हैं मवेशी

वहीं रेखारानी ने बताया कि फैक्ट्री के प्रदूषण के कारण गांव में मवेशी मर रहे हैं. लोग बीमार हो रहे हैं और पेड़-पौधे सूख रहे हैं. गांव के हैंडपंप का पानी खराब हो गया है. चार साल में चार गाय मर गई हैं. मवेशी प्रदूषित पानी पीने से मर रहे हैं. सिंधी लाल अहिरवार ने बताया कि फैक्ट्री की चिमनी से निकलने वाला धुआं सांस लेने में मुश्किल पैदा करता है. फैक्ट्री से गांव की तरफ जिस दिन हवा रहती है उस दिन सांस लेने में काफी दिक्कत होती है.

वहीं यहीं के छोटू अहिरवार ने बताया हैंडपंप के पानी से नहाने से संक्रमण हो रहा है. डॉक्टर ने कहा कि प्रदूषित पानी से नहाने के कारण संक्रमण हुआ है. पूरे शरीर पर दाने निकल आए हैं.

गांव छोड़कर जाने को मजबूर हैं ग्रामीण

राहुल लोधी ने बताया कि सांस लेने में तकलीफ, सूखी खांसी और आंखों में जलन हो रही है. फैक्ट्री के धुएं से फसलों को नुकसान हो रहा है. आम, महुआ और सागौन के पेड़ सूख रहे हैं. इनमें फल भी नहीं आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि गांव में पहले 1200 वोटर थे जो अब घटकर 700 बचे हैं. प्रदूषण के कारण लोग जमीनें बेचकर गांव छोड़कर जा रहे हैं.

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 बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि मैं क्षेत्र की जनता की समस्या को हल करने के लिए उनके साथ हमेशा हूं.इस संबंध में विधानसभा में बात रखी है परन्तु अभी कार्रवाई नहीं हुई है.

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