Sagar Government school roof Collapses: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों की पोल खोलने वाली एक गंभीर घटना सागर जिले से सामने आई है. खुरई रोड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला गढ़ौली खुर्द में जर्जर भवन की छत का प्लास्टर गिरने से दूसरी कक्षा में पढ़ने वाला 8 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया. बच्चे के सिर में गहरी चोट आई है, जिसे उपचार के लिए सागर के भाग्योदय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों द्वारा जटिल ऑपरेशन किया जा रहा है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है.
पढ़ाई के दौरान अचानक गिरा छत का प्लास्टर
जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 11 बजे की है. कक्षा में पढ़ाई के दौरान अचानक छत से प्लास्टर गिरने के कारण अफरा-तफरी मच गई. स्कूल प्रबंधन द्वारा सभी बच्चों को बाहर निकाल दिया गया, लेकिन इसी दौरान घायल छात्र का कुछ सामान कक्षा में रह गया. जब वह दोबारा सामान लेने कक्षा में गया, तभी छत की सीलिंग से प्लास्टर का बड़ा टुकड़ा उसके सिर पर गिर गया.
एक छात्र गंभीर रूप से घायल
घायल बच्चे के पिता रामकेश बंसल ने बताया कि स्कूल से फोन कर उन्हें बेटे के घायल होने की सूचना दी गई. काम छोड़कर जब वे स्कूल पहुंचे तो देखा कि उनका बेटा बुरी तरह जख्मी था और उसके सिर से खून बह रहा था. इसके बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे.
यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की भवन सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. इससे पहले भी प्रदेश के कई जिलों में जर्जर स्कूल भवनों से जुड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होने से ऐसे हादसे लगातार दोहराए जा रहे हैं.
गरीब और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में इस भरोसे के साथ भेजते हैं कि वहां उन्हें सुरक्षित वातावरण मिलेगा, लेकिन सागर से सटे क्षेत्र में स्थित इस स्कूल की जर्जर हालत ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं.
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले को कितनी संवेदनशीलता से लेता है, जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, या फिर यह मामला भी कागजी जांच तक सीमित रह जाएगा.
सवालों के घेरे में सरकारी स्कूलों की सुरक्षा
सरकारी स्कूलों को लेकर सरकारी विज्ञापनों में बेहतर भवन, सुरक्षित कक्षाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन गढ़ौली खुर्द प्राथमिक शाला की यह घटना उन दावों की सच्चाई उजागर करती है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि छत का प्लास्टर क्यों गिरा, बल्कि यह है कि जर्जर भवन में मासूम बच्चों को पढ़ने के लिए क्यों बैठाया गया. इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार जैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले. फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने किसी बैठक में व्यस्त होने की बात कहकर कॉल काट दिया.
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