Sagar Doctor Shruti Sharma: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर के लिए यह गर्व का क्षण है... इस कॉलेज की फिजियोथेरेपी विभाग में पदस्थ डॉ. श्रुति शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय मैनुअल थेरेपी कॉन्फ्रेंस 2026 में पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर सागर सहित मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है. यह चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस 8 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी. आयोजन सामाजिक न्याय और निशक्तजन कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में हुआ, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों के फिजियोथेरेपिस्ट और शोधकर्ता शामिल हुए थे.
देशभर में हासिल किया प्रथम स्थान
कॉन्फ्रेंस में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर से डॉ. श्रुति शर्मा ने सहभागिता की और अपने शोध पत्र के माध्यम से निर्णायकों व विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया. उनके शोध को न केवल सराहा गया, बल्कि उसे पूरे भारत में प्रथम स्थान से सम्मानित भी किया गया. यह उपलब्धि सागर जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात मानी जा रही है.
144 मरीजों पर सफल परीक्षण
डॉ. श्रुति शर्मा का शोध प्रसव के बाद महिलाओं में होने वाले कमर दर्द (पोस्ट पार्टम लो बैक पेन) पर केंद्रित था. उन्होंने यह शोध एक वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद पूरा किया, जिसमें 144 महिलाओं को शामिल किया गया. शोध के दौरान उन्होंने पाया कि बिना किसी पेन किलर या अन्य दर्द निवारक दवाओं के, केवल नियमित और वैज्ञानिक तरीके से की गई कसरत और फिजियोथेरेपी तकनीकों के माध्यम से प्रसव के बाद होने वाले कमर दर्द को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है.
डॉ. श्रुति के अनुसार, पेन किलर दवाओं के लंबे समय तक उपयोग से शरीर पर कई दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं. ऐसे में उनका यह शोध उन लाखों महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा, जो प्रसव के बाद कमर दर्द से जूझती हैं और दवाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं. उनका मानना है कि फिजियोथेरेपी प्राकृतिक, सुरक्षित और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है.
कौन हैं डॉ. श्रुति शर्मा?
डॉ. श्रुति शर्मा मूल रूप से मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की रहने वाली हैं. वो वर्ष 2022 से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर में सेवाएं दे रही हैं. वो एक बच्चे की मां हैं और उनके पति पेशे से इंजीनियर हैं. श्रुति शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं.
12वीं कक्षा में हासिल की 100 में से 100 अंक
उन्होंने 12वीं कक्षा में जीव विज्ञान विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए थे. वो पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी उन्होंने अपने सपनों को साकार किया.
कुछ अलग करने का था जुनून
डॉ. श्रुति बताती हैं कि शुरू से ही उनमें कुछ अलग करने का जुनून था. जब कॉलेज के समय उनके अधिकतर साथी एमबीबीएस करने की योजना बना रहे थे, तब उन्होंने फिजियोथेरेपी को अपना करियर चुना. इसके पीछे उनका स्पष्ट विचार था कि एमबीबीएस डॉक्टर मरीज को जीवन देते हैं, जबकि फिजियोथेरेपिस्ट मरीज को बेहतर तरीके से जीना सिखाते हैं. फिजियोथेरेपी के माध्यम से बिना सर्जरी और बिना दर्द के मरीज को स्वास्थ्य लाभ दिया जा सकता है.
डॉ. श्रुति शर्मा की वजह से फौजी के चेहरे पर लौटी मुस्कान
अपने करियर का एक भावुक अनुभव साझा करते हुए डॉ. श्रुति बताती हैं कि एक बार एक फौजी मरीज, जिसके प्रशिक्षण के दौरान हाथ में बम फट जाने से हाथ ने काम करना बंद कर दिया था, उनके पास इलाज के लिए आया. कई डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन श्रुति ने लगातार उसका उपचार किया. अंततः जब उस फौजी का हाथ फिर से काम करने लगा और उसके चेहरे पर मुस्कान लौटी, तो वह पल उनके लिए अविस्मरणीय बन गया. उस क्षण को याद करते हुए वे आज भी भावुक हो जाती हैं.
डॉ. श्रुति की इस पूरी सफलता यात्रा में उनके पिता का भी अहम योगदान रहा है. पांच बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा में उन्होंने कभी कोई कमी नहीं आने दी. आज डॉ. श्रुति न केवल एक समर्पित चिकित्सक हैं, बल्कि एक मां और समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी हैं. उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए निश्चय ही प्रेरणा बनेगी.
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