RSS Chief Mohan Bhagwat in Bhopal: “जिस तरह शिव ने पूरी सृष्टि के लिए विष पिया, उसी तरह संघ (RSS) प्रतिदिन आरोपों का विष पीकर भी संयम और राष्ट्रहित में काम करता है.” यह तुलना पंडित प्रदीप मिश्रा ने भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के कार्यक्रम में की प्रदीप मिश्रा ने कहा संघ और शिव के भाव में अद्भुत समानता है. जैसे शिव ने समस्त सृष्टि के लिए विष पिया, वैसे ही संघ प्रतिदिन आरोपों का विष पीकर भी संयम और राष्ट्रहित में कार्य करता है. भोपाल के शिवनेरी भवन और कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित दो कार्यक्रमों स्त्री शक्ति संवाद और सामाजिक सद्भाव सम्मेलन में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत (RSS Chief Dr Mohan Bhagwat) ने लव जिहाद, जनजातीय समाज के समावेश और महिलाओं की भूमिका जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी.
सभ्य समाज की कल्पना स्त्रियों के बिना संभव नहीं : मोहन भागवत
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सभ्य समाज की कल्पना स्त्रियों के बिना संभव नहीं है. उन्होंने कहा “हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारी सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है,”.
उन्होंने कहा कि समाज की संस्थाओं को भी सतर्क रहना होगा और सामूहिक प्रतिकार खड़ा करना होगा. सामाजिक सद्भाव सम्मेलन में भागवत ने जनजातीय समाज को अलग बताने वाले विमर्श को खारिज किया. उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज और तथाकथित मुख्यधारा के बीच विभाजन का विचार कृत्रिम है. “हजारों वर्षों से इस भूमि पर रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है. विविधता में एकता ही हमारी पहचान है.
विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है. बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं. इसी विविधता में एकता को स्वीकार करने वाला समाज हिंदू समाज है. उन्होंने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर झगड़ा नहीं करता.
अखंड भारत पर ये बोले
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को यह कहकर तोड़ने का प्रयास किया गया कि वे अलग हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है. संकट के समय ही नहीं, बल्कि हर समय सद्भावना बनाए रखना आवश्यक है. मिलना, संवाद करना और एक-दूसरे के कार्यों को जानना ही सद्भावना की पहली शर्त है. उन्होंने कहा कि समर्थ को दुर्बल की सहायता करनी चाहिए.
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