Corruption in Maihar: मैहर जिले में स्कूलों के नाम पर हुए कथित लघु निर्माण घोटाले ने अब कानूनी रूप ले लिया है. करीब 4.37 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बीईओ, 17 प्राचार्यों, तीन निजी फर्मों के संचालकों और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. यह कार्रवाई एसडीएम रामनगर की विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद की गई है.
जानकारी के अनुसार रामनगर विकासखंड के कई हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों को भवन मरम्मत, पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे लघु निर्माण कार्यों के लिए शासन से राशि स्वीकृत हुई थी. लेकिन जांच में सामने आया कि कई स्कूलों में बिना काम कराए ही भुगतान कर दिया गया और पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए. इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जिसमें सुलखमा स्कूल में बिना निर्माण कार्य के भुगतान का मुद्दा उठाया गया था. जांच का दायरा बढ़ने पर यह मामला कई अन्य स्कूलों तक पहुंच गया.
एसडीएम जांच में क्या मिला
कलेक्टर के आदेश पर गठित जांच समिति ने पाया कि 18 से अधिक स्कूलों में वास्तविक निर्माण कार्य नहीं हुआ, फिर भी करोड़ों रुपये विभिन्न फर्मों को दे दिए गए. जांच में यह भी सामने आया कि कई प्राचार्यों ने भुगतान स्वीकृति पर हस्ताक्षर किए, जबकि मौके पर निर्माण कार्य का कोई प्रमाण नहीं मिला. जांच रिपोर्ट में कुल 4,37,89,420 रुपये के दुरुपयोग और गबन की पुष्टि की गई.
किन फर्मों को मिला भुगतान
अधिकांश राशि तीन फर्मों के खातों में गई बताई जा रही है:
- वाणी इंफ्रा इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मटेरियल सप्लायर (भोपाल)
- महाकाल ट्रेडर्स (सतना)
- रुद्र इंटरप्राइजेज (मैहर)
आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और प्राचार्यों की मिलीभगत से इन कंपनियों को बिना कार्य पूर्ण हुए ही भुगतान कर दिया गया.
22 लोगों पर एफआईआर
रामनगर थाना पुलिस ने प्रभारी बीईओ की शिकायत पर नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है. पुलिस अब संबंधित कंपनियों के संचालकों और कर्मचारियों की तलाश में जुटी है. मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है.
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जिला प्रशासन ने इसे शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाने वाला गंभीर मामला माना है. अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे भी जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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