Cyber Fraud: छोटे शहरों में बढ़ता साइबर जाल; विदिशा में 33 खातों से लाखों की ठगी का पर्दाफाश

Cyber Crime: गिरोह की सबसे बड़ी चालाकी यही थी कि वे अपने नाम से किसी भी खाते का प्रयोग नहीं करते थे. साइबर ठगी, ऑनलाइन गेमिंग और अवैध पैसों का लेनदेन सब दूसरों के खातों से किया जाता था. कई पीड़ितों को तो यह तक पता नहीं था कि उनके खाते से किस तरह का अपराध संचालित हो रहा है.

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Cyber Fraud: छोटे शहरों में बढ़ता साइबर जाल; विदिशा में 33 खातों से लाखों की ठगी का पर्दाफाश

Cyber Crime MP: मध्यप्रदेश में साइबर अपराध (Cyber Crime) अब महानगरों तक सीमित नहीं रहा है. छोटे शहरों और कस्बों में भी साइबर ठगों ने अपनी जड़ें गहरी जमा ली हैं. हर दिन नए तरीके सामने आ रहे हैं, जिनसे आम और जरूरतमंद लोग सबसे अधिक शिकार बन रहे हैं. विदिशा जिले में सामने आया ताजा मामला इस बढ़ते खतरे की भयावह तस्वीर पेश करता है. विदिशा और गंजबासौदा क्षेत्र में 33 बैंक खातों के जरिए लाखों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है. यह पूरा नेटवर्क साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े पैसों के लेनदेन में इस्तेमाल किया जा रहा था. चौंकाने वाली बात यह रही कि इन खातों का संचालन विदिशा से नहीं, बल्कि ग्वालियर में बैठा एक सरगना कर रहा था.

गरीबी को हथियार बनाया

सिविल लाइन थाना पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था. गिरोह के स्थानीय एजेंट विनय माथुर और कृष्णकांत कुर्मी हैं तो गंजबासौदा तिरंगा चौक के रहने वाले हैं. ये आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को टारगेट बनाते थे.

ठगी का तरीका ऐसा था

जरूरतमंद लोगों को 3,000 रुपये का लालच देते थे, उसके बाद उनके नाम पर नए बैंक खाते खुलवाए जाते. पासबुक, एटीएम और पिन लेकर ग्वालियर भेजा जाता. वहीं मास्टरमाइंड हर खाते के बदले एजेंटों को 7,000 रुपये देता था.

खाताधारक फंसते रहे, आरोपी बचते रहे

गिरोह की सबसे बड़ी चालाकी यही थी कि वे अपने नाम से किसी भी खाते का प्रयोग नहीं करते थे. साइबर ठगी, ऑनलाइन गेमिंग और अवैध पैसों का लेनदेन सब दूसरों के खातों से किया जाता था. कई पीड़ितों को तो यह तक पता नहीं था कि उनके खाते से किस तरह का अपराध संचालित हो रहा है.

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चार बैंकों में खुले 33 खाते

पुलिस जांच के दौरान पता चला कि चार बैंकों में 33 खाते खोले गए थे. ये सभी खाते पिछले एक महीने में ही खोले गए थे. इनमें इन बैंकों के खाते थे.

  • इंडियन बैंक — 20 खाते
  • इंडियन ओवरसीज बैंक — 11 खाते
  • बैंक ऑफ इंडिया — 1 खाता
  • पंजाब नेशनल बैंक — 1 खाता

थाना प्रभारी आरके मिश्र के मुताबिक, कई खातों को एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग‑अलग बैंकों में खोला गया था, जो मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित साइबर ठगी की ओर साफ संकेत देता है.

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राज्य के बाहर तक नेटवर्क फैले होने की आशंका

पुलिस को संदेह है कि यह नेटवर्क केवल विदिशा या गंजबासौदा तक सीमित नहीं है. इसके तार अन्य जिलों के अलावा राज्यों तक फैले हो सकते हैं. मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है, जो पूरे नेटवर्क की परत‑दर‑परत जांच कर रहा है.

सिस्टम में खामियां या नेटवर्क की चालाकी?

यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल उठाता है कि बैंक खाते खोलते समय KYC की निगरानी कितनी मजबूत है? जरूरतमंद लोगों को इस जाल से कैसे बचाया जा सकता है? क्या साइबर अपराध अब संगठित अपराध के नए स्वरूप में बदल रहा है?

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पुलिस की अपील

पुलिस ने जनता से आग्रह किया है कि किसी के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता न खुलवाएं. एटीएम, पासबुक और पिन किसी को बिल्कुल न दें. संदिग्ध कॉल, लिंक और ऑफर से सावधान रहें.

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