Pench Tiger Reserve Langdi Tigress: पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी की सबसे ज्यादा पहचानी जाने वाली और वरिष्ठ बाघिन पीएन‑20 (टी‑20), जिसे लोग ‘लंगड़ी बाघिन' के नाम से जानते थे, अब नहीं रहीं. उम्र ज्यादा हो जाने और शारीरिक कमजोरी के कारण उनकी मौत हो गई. पेंच प्रबंधन ने नियमों के अनुसार सम्मानपूर्वक उनका अंतिम संस्कार किया. शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे बाघिन का शव कर्माझिरी रेंज के मुनारा कैम्प के पास मिला. पीएन‑20 का जन्म साल 2008 में हुआ था और लगभग 18 साल की उम्र पार कर उन्होंने पेंच टाइगर रिजर्व में सबसे लंबे समय तक जीवित रहने का रिकॉर्ड बनाया.
Pench Tiger Reserve Langdi Tigress Death: 'लंगड़ी बाघिन' की मौत
6 मार्च 2026 को दिखाई दी थी आखिरी बार
पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार बाघिन को 6 मार्च 2026 को आखिरी बार पर्यटकों ने देखा था. पिछले कई महीनों से वह उम्र के कारण काफी कमजोर हो गई थीं. वृद्धावस्था की वजह से ही अंततः उनकी मृत्यु हुई.
Pench Tiger Reserve Langdi Tigress Death: 'लंगड़ी बाघिन' का अंतिम संस्कार
सम्मानपूर्वक विदाई; NTCA गाइडलाइन के अनुसार अंतिम संस्कार
वरिष्ठ बाघिन के निधन पर पेंच प्रबंधन और सिवनी के मुख्य वन संरक्षक ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. NTCA (National Tiger Conservation Authority) की गाइडलाइंस के अनुसार वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक की मौजूदगी में पोस्टमार्टम हुआ. इसके बाद चिता में आग लगाकर कर सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया.
Pench Tiger Reserve Langdi Tigress Death: 'लंगड़ी बाघिन' का अंतिम संस्कार
क्यों पड़ी ‘लंगड़ी बाघिन' नाम से पहचाना जाने लगी?
पीएन‑20 की पहचान ‘लंगड़ी बाघिन' इसलिए बनी, क्योंकि उनके सामने वाले पंजे में जन्मजात विकृति थी# चलने में हल्की लंगड़ाहट दिखती थी. पर्यटकों के बीच यह पहचान इतनी मशहूर हुई कि उनका असली नंबर भूला दिया गया. इसके बावजूद बाघिन ने अपने क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा सक्रिय रूप से संभाले रखा.
कॉलरवाली की बहन थी लंगड़ी बाघिन
पीएन‑20 पेंच की विश्वविख्यात बाघिन ‘कॉलरवाली' की सहोदर बहन थीं. कर्माझिरी रेंज के लगभग 70% क्षेत्र में उनका विचरण था. यह बाघिन पर्यटकों और वनकर्मियों दोनों की प्रिय मानी जाती थी.
शिकार करना मुश्किल हुआ, फिर भी दिखाया जज़्बा
बुजुर्ग होने के कारण यह बाघिन खुद शिकार नहीं कर पाती थी. लेकिन दूसरे बाघों और तेंदुओं द्वारा छोड़े गए शिकार से वह अपना जीवन यापन कर लेती थी. ज्यादा उम्र होने के बावजूद उनका जीवित रहने का जज़्बा सभी को प्रेरित करता था.
10 शावकों को जन्म देकर बढ़ाई पेंच की आबादी
अपने जीवनकाल में पीएन‑20 ने कुल 10 शावकों को जन्म दिया. इन शावकों ने पेंच और आसपास के क्षेत्रों में अपने‑अपने क्षेत्र स्थापित किए और बाघों की संख्या बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया.
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