जिंदा लोगों के ही बना दिए मृत्यु प्रमाणपत्र, सरकारी राशि हड़पने के लिए कर्मचारियों की अजीब करामात

सरकार की योजना है कि जो लोग मध्य प्रदेश में बीपीएल श्रेणी में आते हैं, उनमें से किसी व्यक्ति की मौत होने पर परिजनों को उसकी अंत्येष्टि के लिए 5000 रुपए मिलते हैं जबकि संबल योजना के तहत परिजनों को एक मुश्त दो लाख रुपए की अनुग्रह राशि भी प्रदान की जाती है, जिसे पाने के लिए व्यक्ति को आवेदन के साथ मृत्यु प्रमाणपत्र लगाना पड़ता है.

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सरकारी राशि हड़पने के लिए कर्मचारियों की अजीब करामात

Gwalior News : अपात्र लोगों की ओर से सरकारी योजनाओं (MP Government Schemes) का लाभ लेने की खबरें और ऐसे घोटाले की खबरें तो आम हैं लेकिन ग्वालियर (Gwalior) में जो घोटाला हुआ है वह अपने आप में अनोखा ही है. यहां उप सरपंच और पंचायत के सहायक सचिव ने मृत लोगों की अंत्येष्टि और संबल योजना में इनकी मौत पर मिलने वाली अनुग्रह राशि हड़पने के नाम पर ऐसे लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र (Death Certificate) बना दिए जो न केवल जीवित हैं बल्कि पूरी तरह से स्वस्थ्य और भले-चंगे हैं. 

क्या है पूरा मामला?

सरकार की योजना है कि जो लोग मध्य प्रदेश में बीपीएल श्रेणी में आते हैं, उनमें से किसी व्यक्ति की मौत होने पर परिजनों को उसकी अंत्येष्टि के लिए 5000 रुपए मिलते हैं जबकि संबल योजना के तहत परिजनों को एक मुश्त दो लाख रुपए की अनुग्रह राशि भी प्रदान की जाती है, जिसे पाने के लिए व्यक्ति को आवेदन के साथ मृत्यु प्रमाणपत्र लगाना पड़ता है. ग्वालियर जिले की भितरवार जनपद पंचायत इलाके की किठौन्दा ग्राम पंचायत के कारिंदों ने इस राशि को हड़पने के लिए जिंदा लोगों को ही मृत घोषित करके उनके डेथ सर्टिफिकेट बनवा लिए. 

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चार लोगों के नाम पर स्वीकृत करवा लिए पैसे 

बताया गया कि घोटाले का यह नया तरीका ढूंढ़ा किठौन्दा ग्राम पंचायत के सहायक सचिव भीखम जाटव और उप सरपंच के पति पंचम वर्मा ने. इन लोगों ने गुपचुप तरीके से ऐसे प्रमाणपत्र बना लिए और इनकी राशि पाने के लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी. ग्रामीणों को इसकी जानकारी भी लग गई लेकिन उन्होंने खामोशी ओढ़कर रखी लेकिन चर्चाएं जब जनपद पंचायत के अफसरों तक पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच शुरू की.

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आत्महत्या करने की धमकी देते हैं आरोपी

जांच के दौरान पता चला कि ये दोनों मिलकर चार लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र बनाकर इनके आवेदन भेज चुके हैं. इस दौरान एक नया मामला भी उजागर हुआ. पता चला कि गांव के ख्याली राम जाटव के नाम का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर इनके नाम पर भी अनुग्रह राशि और अंत्येष्टि राशि का प्रकरण पेश किया गया है. अब अधिकारियों को लगता है कि कुछ और मामले उजागर हो सकते हैं. जांच के दौरान जब जांच टीम ने उन जीवित लोगों के बयान दर्ज किए जिनके नाम से फर्जी डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं तो बड़ी चौंकाने वाली बात सामने आई. 

जब उनसे पूछा कि उन्हें ऐसी आशंका थी तो उन्होंने इसकी शिकायत क्यों नहीं की तो उन्होंने बताया कि यह घपला करने वाला ग्राम पंचायत का सहायक सचिव भीखम जाटव धमकी देता है कि अगर किसी ने भी आरटीआई लगाई या शिकायत की तो वह आत्महत्या कर लेगा और सबको फंसाने के लिए गांव वालों के नाम लिख जाऊंगा. इस डर से वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे. 

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स्वीकृत धनराशि का आहरण रोका

जनपद पंचायत भितरवार के सीईओ लक्ष्मी नारायण पिप्पल के अनुसार जिला पंचायत के सीईओ के निर्देश पर जो जांच शुरू की गई थी, इसमें पांच जीवित लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के मामले में जांच दल ने जांच पूरी कर ली है. जांच में बताया गया कि शासकीय राशि हड़पने के लिए पांच जीवित लोगों के नाम के मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए थे, जिनमें से तीन लोगों की (संबल) अनुग्रह सहायता राशि दो-दो लाख रुपए स्वीकृत हुई थी. उन सभी प्रकरणों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है.