धार की भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है. कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जुल्फिकार पठान ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है.
जुल्फिकार पठान के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलें पेश की. सुनवाई के बाद न्यायालय ने एएसआई को निर्देश दिया है कि शुक्रवार को परिसर के बाहर जुम्मे की नमाज की व्यवस्था पूर्ववत जारी रखी जाए. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि परिसर के भीतर ऐसी कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए, जिससे उसके स्वरूप को नुकसान पहुंचे.
800 वर्षों से नमाज का किया दावा
उन्होंने दावा किया कि कमाल मौला मस्जिद में करीब 800 वर्षों से नमाज अदा की जाती रही है और इसी परंपरा के संरक्षण के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है. वहीं, परिसर के बाहर खुले स्थान पर जुम्मे की नमाज अदा किए जाने के सवाल पर जुल्फिकार पठान ने कहा कि इस संबंध में मुस्लिम समाज के वरिष्ठजन बैठक कर अंतिम निर्णय लेंगे. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की नजरें मुस्लिम समाज के फैसले और मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं.
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा का कहना है कि हाईकोर्ट एएसआई के साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को मंदिर घोषित किया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर फैसले की उम्मीद की है. फिलहाल अंतिम आदेश की प्रतीक्षा है.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में क्या कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि एएसआई (ASI) द्वारा भोजशाला परिसर में कोई भी ढांचागत बदलाव यानी Structural Changes नहीं किया जाएगा. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस मोहना की बेंच इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के बाद ये आदेश दिया. इसके अलावा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जहां नमाज को लेकर एक अंतरिम व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव दिया, वहीं हाईकोर्ट द्वारा लंदन म्यूजियम से वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति वापस लाने के आदेश पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं.
सुनवाई के बाद मुस्लिम पक्ष की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, DM और ASI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले में जुलाई के तीसरे हफ्ते में अगली सुनवाई होगी. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि परिसर में शुक्रवार को नमाज़ पर रोक बरकरार रहेगी. इसके अलावा सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार करते हुए कहा कि भोजशाला परिसर के पास नमाज के लिए हर शुक्रवार 1-3 के बीच अलग जगह मुहैया कराया जाए.
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