उमरिया के स्कूल में छात्राओं के अचानक झूमने के पीछे कोई 'साया' नहीं ! डॉक्टर ने बता दी ये वजह

MP School Strange Incident: उमरिया जिले के कल्दा स्कूल में छात्राओं के अचानक झूमने और अजीब व्यवहार से हड़कंप मच गया. स्वास्थ्य विभाग के डॉ. के.सी. सोनी ने इसे 'मास हिस्टीरिया' नामक अस्थाई मानसिक अवस्था बताया है. प्रशासन ने तंत्र-मंत्र की खबरों को खारिज करते हुए जांच शुरू कर दी है.

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Umaria School Girls Incident: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. करकेली विकासखंड के ग्राम कल्दा स्थित शासकीय हाई स्कूल में उस समय हड़कंप मच गया, जब परिसर में मौजूद कई छात्राएं अचानक अजीब हरकतें करने लगीं और झूमने लगीं. इस घटना ने न केवल स्कूल प्रबंधन बल्कि पूरे गांव को चिंता में डाल दिया. देखते ही देखते स्कूल परिसर में ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने प्रभावित छात्राओं को इलाज के लिए डॉक्टरों के पास भेजा. 

प्रशासनिक अमला और मेडिकल टीम मौके पर

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया. सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. प्रभावित छात्राओं को बिना देरी किए तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पाली चिकित्सालय भेजा गया. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि आखिर एक साथ इतनी छात्राओं का व्यवहार असामान्य कैसे हुआ?

Umaria School Girls Incident: उमरिया के सरकारी स्कूल में छात्राएं अचानक इस तरह से झूमने लगीं.

क्या है इस 'अजीब' व्यवहार की वैज्ञानिक वजह?

ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसी घटनाओं को लोग तंत्र-मंत्र या किसी अदृश्य शक्ति से जोड़कर देखने लगते हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह से खारिज किया है. उमरिया जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. केसी. सोनी ने इस मामले पर स्पष्टता देते हुए बताया कि यह एक 'परिस्थितिजन्य अस्थाई मानसिक अवस्था' है. मेडिकल की भाषा में इसे 'मास हिस्टीरिया' या 'कन्वर्जन डिसऑर्डर' कहा जाता है. इसमें व्यक्ति दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने या अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण ऐसी शारीरिक प्रतिक्रियाएं देने लगता है.

मास हिस्टीरिया: डर और तनाव का सामूहिक असर

विशेषज्ञों के अनुसार, जब एक समूह (जैसे कि स्कूल के बच्चे) लंबे समय तक किसी मानसिक दबाव, परीक्षा के डर या किसी सामूहिक सामाजिक तनाव से गुजरते हैं, तो कभी-कभी एक बच्चे को देखकर अन्य बच्चे भी वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं. इसे 'सोशोजेनिक इलनेस' भी कहा जाता है. अच्छी बात यह है कि डॉक्टरों की देखरेख और उचित परामर्श के बाद सभी छात्राओं की स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है और उन्हें वापस घर भेज दिया गया है.

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अफवाहों से बचने की अपील

स्कूल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के अंधविश्वास या अफवाहों पर ध्यान न दें. यह पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसका उपचार मेडिकल साइंस में उपलब्ध है. फिलहाल, राजस्व विभाग की टीम स्कूल के वातावरण और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर शिक्षकों से चर्चा कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
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