MP Politics: कांग्रेस में SC-ST वर्ग से CM उम्मीदवार बनाने की चर्चा तेज; दिग्गी के बाद आया पटवारी का बयान

MP Politics: कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी आगामी चुनावों में सामाजिक समीकरण को साधने की रणनीति पर काम कर रही है. मध्यप्रदेश में एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग से आने वाले नेताओं की भरमार है, और कई दिग्गज नेता इन वर्गों से ताल्लुक रखते हैं.

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MP Politics: कांग्रेस में SC-ST वर्ग से CM उम्मीदवार बनाने की चर्चा तेज; दिग्गी के बाद आया पटवारी का बयान

MP Politics: मध्यप्रदेश की राजनीति में नया समीकरण बनता दिख रहा है. कांग्रेस पार्टी (Congress Pary) के भीतर एसटी और एससी (SC-ST) वर्ग से मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) के बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने भी इस विचार का समर्थन किया है. वहीं कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान का हितैषी करार दिया है.

पटवारी ने क्या कहा?

जीतू पटवारी ने कहा कि दिग्विजय सिंह सीनियर नेता हैं और जो भी कहते हैं, सोच-समझकर कहते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री एसटी या एससी वर्ग से आता है तो यह 100 प्रतिशत खुशी की बात होगी.

कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी आगामी चुनावों में सामाजिक समीकरण को साधने की रणनीति पर काम कर रही है. मध्यप्रदेश में एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग से आने वाले नेताओं की भरमार है, और कई दिग्गज नेता इन वर्गों से ताल्लुक रखते हैं.

इस बीच, दिग्विजय सिंह के राज्यसभा सीट छोड़ने के फैसले पर भी जीतू पटवारी ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह बहुत सीनियर नेता हैं और जो भी निर्णय लेते हैं, वह सोच-समझकर लेते हैं.

क्या है मामला?

कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल डिक्लेरेशन पर चर्चा के दौरान राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग का मुख्यमंत्री कांग्रेस की ओर से बनाए जाने की पैरवी की थी. उनके इस बयान के बाद से सियासी गर्माहट है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अहिरवार ने उन्हें पत्र लिखा था, जिसमें कहा है कि दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल को सामाजिक न्याय और उत्थान के लिए याद किया जाएगा.

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अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष अहिरवार ने आगे लिखा कि राज्य की लगभग 17 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति है और इसकी भावना और अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए. यह न केवल सामाजिक संतुलन और संवैधानिक भावना के अनुरूप होगा बल्कि दलित समाज के आत्मसम्मान और राजनीतिक सहभागिता को भी व्यक्त करेगा.

इस पत्र में आगे कहा गया है कि दिग्विजय सिंह के अनुभव, मार्गदर्शन और प्रभावशाली भूमिका के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष इस संदर्भ में पहल भी की जाएगी और सामाजिक न्याय की आवाज को मजबूती प्रदान की जाएगी.

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