नर्सिंग घोटाले मामले पर MP हाईकोर्ट सख्त, अपात्र संस्थानों को मान्यता देने वाले अधिकारियों की मांगी लिस्ट

MP Nursing Scam: मध्य प्रदेश नर्सिंग घोटाले के जिम्मेदार अधिकारियों के नाम हाईकोर्ट के सामने रखे जाएंगे. दरअसल, हाईकोर्ट ने सरकार से घोटाले के जिम्मेदारों की लिस्ट मांगी है.

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MP Hight Court: मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े घोटाले पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन अधिकारियों की विस्तृत सूची मांगी है, जिन्होंने अपात्र संस्थानों को मंजूरी देने में भूमिका निभाई थी. इस घोटाले की सीबीआई जांच के बाद प्रदेश के 500 से अधिक नर्सिंग कॉलेजों पर ताले लग चुके हैं.

अपात्र मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज?

अब अदालत ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC), मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल (MPNRC) और मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी (MPMSU) जैसी मान्यता देने वाली संस्थाओं के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों की सूची पेश करने का निर्देश दिया है. अदालत के इस आदेश के बाद इन अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है.

इन अधिकारियों की सूची होगी पेश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मान्यता देने की अवधि में कार्यरत और पदस्थ अधिकारियों की सूची प्रस्तुत की जाए. इनमें निम्नलिखित पदाधिकारी शामिल होंगे:

एमपी नर्सिंग काउंसिल के तत्कालीन चेयरमैन (संचालक चिकित्सा शिक्षा)

आईएनसी और एमपीएनआरसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार

दोनों काउंसिल के सदस्य

मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार

मेडिकल विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्य

निरीक्षण दल के सदस्य

हाईकोर्ट ने सरकार से घोटाले के जिम्मेदारों की मांगी लिस्ट

इस मामले की सुनवाई लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर जनहित याचिका के साथ अन्य नर्सिंग घोटाले से जुड़े मामलों के साथ की गई. हाईकोर्ट की विशेष पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी और न्यायमूर्ति अचल कुमार पालीवाल शामिल हैं. हाईकोरट ने अगली सुनवाई तक पूरी सूची पेश करने का आदेश दिया है.

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गायब सीसीटीवी फुटेज पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

नर्सिंग घोटाले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने 13 से 19 दिसंबर 2024 के मध्य मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल के कार्यालय की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. पुलिस कमिश्नर और साइबर सेल को यह डेटा पुनः प्राप्त कर जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था, लेकिन साइबर सेल ने तकनीकी सीमाओं का हवाला देते हुए असमर्थता जताई थी.

आज की सुनवाई में भी कोई ठोस रिपोर्ट प्रस्तुत न किए जाने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई और स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि अगली सुनवाई तक रिपोर्ट नहीं सौंपी जाती, तो केंद्रीय फॉरेंसिक लैब के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा.

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