वाह! शादी के बजट से बनवाया 7 लाख का पक्षी टॉवर, MP की सलोनी जैन ने जीत लिया सबका दिल

मध्य प्रदेश के आगर-मालवा की बेटी सलोनी जैन ने अपनी शादी में फिजूलखर्ची रोकने के लिए 7 लाख रुपये की लागत से 700 पक्षियों के लिए एक भव्य बहुमंजिला 'पक्षी टॉवर' बनवाया है.

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आमतौर पर शादियां शोर-शराबे, भव्य सजावट, आतिशबाजी और लाखों रुपये के खर्च के लिए जानी जाती हैं. लेकिन मध्‍य प्रदेश के आगर-मालवा की बेटी सलोनी जैन ने अपनी शादी को केवल एक पारिवारिक समारोह तक सीमित न रखकर, उसे समाज और प्रकृति के लिए प्रेरणा का माध्यम बना दिया है. उन्होंने विवाह के कई पारंपरिक और खर्चीले आयोजनों में कटौती कर जीव-दया और पर्यावरण संरक्षण का ऐसा अनूठा संदेश दिया है, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है.

27 जून को विवाह बंधन में बंधने जा रही सलोनी जैन और उनके परिवार ने शहर के प्रसिद्ध मोती सागर (बड़ा तालाब) के किनारे करीब 7 लाख रुपये की लागत से लगभग 700 पक्षियों के लिए एक बहुमंजिला आशियाना तैयार करवाया है. यह विशाल पक्षी टॉवर गर्मी, सर्दी और बारिश जैसे कठिन मौसम में पक्षियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराएगा.

इस अनूठी पहल में स्थानीय नगर पालिका ने भी सराहनीय सहयोग करते हुए निर्माण के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया. नगर पालिका अध्यक्ष नीलेश पटेल ने बताया कि लगभग 400 बीघा क्षेत्र में फैला मोती सागर तालाब पहले से ही पक्षियों के लिए एक अनुकूल प्राकृतिक आवास रहा है. ऐसे में यहाँ निर्मित यह विशेष पक्षी घर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को सुरक्षित बसेरा प्रदान करेगा और उनकी संख्या बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा. 

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श्री पटेल ने आगे कहा कि सलोनी जैन ने अपनी शादी को समाजहित से जोड़कर एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है. नगर पालिका द्वारा जल्द ही यहाँ पक्षियों के लिए दाना-पानी की स्थायी व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, ताकि आम नागरिक भी यहाँ आकर पक्षियों को दाना डाल सकें और जीव-दया के इस अभियान का हिस्सा बन सकें. शनिवार शाम को एक सादगीपूर्ण समारोह में इस पक्षी टॉवर का शुभारंभ किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में नागरिक, समाजजन और गणमान्य लोग मौजूद रहे.

लाखों की दावत से बेहतर है आत्मिक संतुष्टि

अपनी इस सोच पर सलोनी जैन बहुत सहज भाव से कहती हैं, "शादियों में लाखों रुपये खर्च कर एक समय का भोजन कराया जाता है, जिसका स्वाद कुछ देर बाद ही यादों में सिमट जाता है. यदि उसी धन का एक हिस्सा जीव-दया और समाजहित में लगाया जाए, तो उससे मिलने वाली आत्मिक संतुष्टि कहीं अधिक बड़ी होती है."

उनका मानना है कि यदि लोग अपने सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों को समाज व प्रकृति के हित से जोड़ें, तो सकारात्मक बदलाव की एक बड़ी शुरुआत हो सकती है. शादियों के कई खर्च ऐसे होते हैं जिनकी याद समय के साथ धुंधली पड़ जाती है, लेकिन बेजुबान जीवों के लिए किया गया एक छोटा सा प्रयास वर्षों तक सुख और संतोष देता है.

जैन मुनि ने की सराहना

शुभारंभ समारोह में उपस्थित जैन मुनि धर्मघोष विजय जी महाराज ने समाज से जीव-दया के इस मार्ग को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पशु-पक्षी भी हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें सुरक्षित आश्रय तथा दाना-पानी उपलब्ध कराना प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है. करुणा और संवेदना ही एक बेहतर समाज तथा स्वस्थ पर्यावरण की आधारशिला हैं.

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शहर की नई पहचान बनेगा यह टॉवर

आस्था और शहरवासियों की दिनचर्या का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले मोती सागर तालाब पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पक्षियों को दाना डालने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने पहुँचते हैं. ऐसे में यह पक्षी टॉवर न केवल पक्षियों के लिए सुरक्षित घर बनेगा, बल्कि शहर की एक नई पहचान और प्रमुख आकर्षण के रूप में भी उभरेगा. सलोनी जैन और उनके परिवार की यह पहल एक सशक्त संदेश देती है कि शादी जैसे पारिवारिक अवसर केवल उत्सव मनाने का जरिया नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का बेहतरीन अवसर भी हो सकते हैं.

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